चीनी मिलों और शराब कारखानों के कचरे से प्रदूषित गोमती नदी का कायाकल्प शुरू हो गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार की 1107 करोड़ की गोमती रिवरफ्रंट परियोजना पर आईआईटी रुड़की ने पर्यावरणीय प्रभाव एवं प्रबंधन पर सर्वे भी शुरू कर दिया है। पीलीभीत जिले से निकलकर वाराणसी के पास गंगा में मिलने वाली यह नदी अपने साथ गंगा में भी पानी लाती है लिहाजा इस परियोजना से क्लीन गंगा मिशन की राह भी आसान होगी।
गोमती रिवरफ्रंट परियोजना के अंतर्गत लखनऊ में सीतापुर बाईपास से शहीद पथ के बीच 16 किलोमीटर की दूरी में रिवर फ्रंट को विदेशी तर्ज पर विकसित किया जाना है।
गोमती के फैलाव को रोकने के लिए दोनों किनारे हैरीटेज तौर पर विकसित कर यहां पार्क, घाट, साइकिलिंग, जॉगिंग, बच्चों के खेलने का स्थान, लॉन, तांगा ट्रैक, ग्रीन एरिया फॉर कल्चरल एक्टिविटी आदि पर काम किया जाएगा।
वर्तमान में बेहद प्रदूषित हो चुकी गोमती नदी में लखनऊ में सीतापुर बाईपास से शहीद पथ के बीच 30 किलोमीटर की दूरी में 37 अति प्रदूषित नाले गिर रहे हैं। परियोजना के तहत इन्हें बंद किया जा चुका है।
- डॉ. कमल जैन, परियोजना के प्रधान अन्वेषक व वैज्ञानिक
तकनीक
परियोजना के पर्यावरणीय अध्ययन के लिए जीआईएस तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसमें पर्यावरण के संबंध में पूर्व की स्थिति और निर्माण के बाद आने वाले कई दशकों में पर्यावरण के परिवर्तन का आकलन होगा।
बढ़ती आबादी के साथ नदी के पर्यावरण में हुए परिवर्तन का अध्ययन किया जाएगा ताकि परियोजना के तहत होने वाले कार्यों के बाद नदी और आसपास के इलाकों में पर्यावरण की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सके।