खरीद फरोख्त के घेरे में आए धारचूला के एक होटल में मिले चमोली के करीब 41 जिला और क्षेत्र पंचायतों के सदस्यों को क्लीन चिट मिल गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने खरीद फरोख्त या दबाव की पुष्टि होने पर इन सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। जिलाधिकारी चमोली की रिपोर्ट में इस तरह का मामला न होने की बात कही गई है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक चमोली जिला प्रशासन से मिली रिपोर्ट में शिकायत की पुष्टि न होने की बात की गई है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों में शिकायत निवारण प्रकोष्ठों का गठन कर चुनाव में खरीद फरोख्त, अपहरण, दबाव आदि का कोई मामला सामने आने पर प्राथमिक जांच करने और पुष्टि होने पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। आयोग ने स्पष्ट कहा था कि शिकायत के लिए इंतजार न किया जाए और समाचार पत्रों, सोशल मीडिया में कोई मामला सामने आता है तो उसका भी संज्ञान लिया जाए। इसी बीच चमोली के करीब 50 सदस्यों के गायब होने का भी मामला सामने आया।
यह भी पुष्ट हुआ कि इनमें से 41 सदस्या धारचूला के एक होटल में रुके हुए हैं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर चमोली जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन ने जांच की। राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक इन सदस्यों के खिलाफ खरीद फरोख्त में लिप्त होने का कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस आधार पर इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। दूसरी तरफ, इसी तरह पिथौरागढ़ के गायब सदस्यों को लेकर अभी जांच जारी होने की बात की जा रही है।
हाथ पर पट्टी बांधकर वोट न करने का बहाना नहीं चलेगा
मतदान के दिन हाथ पर पट्टी बांधकर वोट न कर पाने का बहाना इस बार नहीं चलेगा। शैक्षिक योग्यता का निर्धारण होने के कारण इस बार मतदाता सदस्य यह नहीं कह सकते कि अंगूठा नहीं लगा पा रहे हैं। दूसरी ओर, मतदान केंद्रों में इस बार वीडियोग्राफी भी होगी। मतदाता अपने साथ मोबाइल और कैमरा भी नहीं ले जा पाएंगे। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता विपुल जैन के मुताबिक हाईकोर्ट के निर्देश पर राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से यह आदेश जारी होने पर मतदाताआें के प्रभावित होने पर बहुत हद तक रोक लगेगी।
पंचायत जनाधिकार मंच ने जताया विरोध
पंचायत जनाधिकार मंच ने सत्ता पक्ष पर चुनाव को प्रभावित करने के लिए अपनी ताकत के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। मंच के संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर आपत्तियों के निस्तारण के लिए शिकायतकर्ताओं को समय दिया ही नहीं। आरक्षण तय होते ही चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया। इससे हाईकोर्ट से न्याय की आस लगाए याचिकाकर्ताओं को मौका नहीं मिल पाया।