जिला जज की मौजूदगी में ही जिला अस्पताल में किशोरी का मेडिकल परीक्षण हुआ था, जिसमें उसके शरीर पर चोटों के 20 निशान पाए गए थे। उस वक्त एएसपी रचिता जुयाल की ओर से सिडकुल थाने में जज दीपाली शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। अप्रैल में सीओ कनखल रहे मनोज कात्याल ने दीपाली शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। मामले में हाईकोर्ट ने जज दीपाली शर्मा को निलंबित कर दिया था।
वहीं, बीते अगस्त में उत्तराखंड शासन ने जज के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने का फैसला लिया था। इस संबंध में अभियोजन पक्ष ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दायर किया था। जज के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लिए जाने के उत्तराखंड शासन के फैसले को चुनौती देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने बुधवार को सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट में शासन के फैसले को लेकर हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने जज के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने की उत्तराखंड शासन की अपील को निरस्त कर दिया। इस दौरान कोर्ट में मौजूद रहे सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने इसकी पुष्टि की है।