बाजार में तवा पतंग, अध्धी, पौनी और कपड़ी की पतंगों की बड़े पैमाने पर खरीदारी की जा रही है। जबकि मांझे को लेकर दुकानदार सादे और इंडियन मांझे की बिक्री तक ही सीमित हैं। चीनी मांझा बाजारों से पूरी तरह से गायब दिखाई दे रहा है।
पतंगबाजी करते समय जागरूकता और समझदारी ही आपको पर्व मनाने के आनंद को बढ़ा सकती है। विशेषकर चीनी मांझे के प्रयोग से दूरी आपने के त्योहार को उत्साहित ओर आनंदित बना देगी। खासकर बच्चों को चीनी मांझे के प्रयोग से दूर रखें। चीनी मांझा ब्लेड की तरह धारदार होता है। इस मांझे से पतंग उड़ाने में खुद को और अन्य लोगों को भी जान का जोखिम होता है। इसलिए चीनी मांझे की बिक्री करने वाले दुकानदारों की सूचना देकर जुर्माने के साथ ही कठोर कार्रवाई की मुहिम को मजबूती प्रदान करें।
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पतंग की खरीद और बिक्री को लेकर बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। लोहड़ी और मकर सक्रांति पर्व के उपलक्ष्य में लोग बड़ी संख्या में पतंगों की खरीदारी कर रहे हैं। वहीं दुकानों पर बच्चों से लेकर युवाओं की रोज खूब भीड़ लग रही है। धामावाला बाजार में पतंग विक्रेताओं के यहां पर विभिन्न रंग-बिरंगी पतंगों की जमकर खरीदारी हो रही है।
बाजार में तवा पतंग, अध्धी, पौनी और कपड़ी की पतंगों की बड़े पैमाने पर खरीदारी की जा रही है। जबकि मांझे को लेकर दुकानदार सादे और इंडियन मांझे की बिक्री तक ही सीमित हैं। चीनी मांझा बाजारों से पूरी तरह से गायब दिखाई दे रहा है।
हालांकि लोगों और दुकानदारों की जागरूकता के कारण भी इसकी खरीदारी पर ब्रेक लगा है। सादे धागे की 50 मीटर की रील पांच रुपये और इंडियन मांझे एक हजार गज की रील 150 से 200 रुपये तक बाजार में बिक रही है।
चीनी मांझे की बजाय लोगों को सादे धागे और इंडियन मांझे का प्रयोग करना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न होने पाए। साथ ही चीनी मांझे की बिक्री और खरीदारी करने वालों पर जुर्माने के साथ ही कठोर कार्रवाई की जाए।
चीनी मांझे पर प्रतिबंध लगना चाहिए। माता-पिता को अपने बच्चों को इसकी खरीदारी न करने के बारे में जागरूक करना चाहिए।
-संजय भाटिया
चीनी मांझा कब किसी के साथ हादसे का कारण बन जाए कुछ पता नहीं। इस पर रोक लगना जरूरी है। चीनी मांझे का प्रयोग न करने के लिए समाज को जागरूक करना बेहद जरूरी है।
- विक्की खन्ना