फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चीन ने की ऐसी निगरानी जो पहले कभी नहीं हुई, कैलाश मानसरोवर यात्रियों ने बताई चौंकाने वाली बात

Fri, 10 Aug 2018 09:40 AM IST
भक्त दर्शन पांडेय, अमर उजाला, पिथौरागढ़
विज्ञापन
- फोटो : Getty images
विज्ञापन

इस बार सीमा पर चीन ने ऐसी निगरानी की है जो आज से पहले कभी नहीं की। कैलाश मानसरोवर से वापस आए यात्रियों ने खुद यह बात बताई है।

विज्ञापन


चीन में प्रवेश पर इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रियों के फिंगर और आईरिस प्रिंट ले रहा है। वापसी में इनका मेल होने पर ही यात्रियों को वापस आने दिया जा रहा है।

यात्रियों को ढोने वाली बसों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पहले भी यात्रा कर चुके यात्रियों का कहना है पहले कभी ऐसा नहीं किया गया और इस बार यह शायद दोकलम विवाद का असर है।

विज्ञापन

हर यात्री के फिंगरप्रिंट और आंख के आईरिस का नया नियम

kailash mansarovar
कैलाश मानसरोवर की यात्रा में हर साल भारत से लगभग एक हजार यात्री चीन जाते हैं। लिपुलेख दर्रे से संचालित होने वाली इस यात्रा में शामिल यात्रियों की जांच के लिए इस वर्ष चीन प्रशासन ने हर यात्री के फिंगरप्रिंट और आंख के आईरिस का नया नियम बनाया है।

सातवें दल में शामिल दिल्ली निवासी जगदीश सिंह ने बताया कि चीन सीमा पर प्रवेश करने के बाद पहले पड़ाव पर ही चीनी सेना के जवानों ने हर यात्री के फिंगरप्रिंट और आंखों के आईरिस का प्रिंट लिया।

वापसी में फिंगरप्रिंट और आईरिस के मिलान के बाद ही वापसी की अनुमति मिल रही है। दो बार यात्रा कर चुके जगदीश सिंह के अनुसार पिछले साल तक चीन में प्रवेश करने के बाद कस्टम के अधिकारी उनके सामान की चेकिंग कर आगे भेज देते थे। इस बार यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
विज्ञापन

शायद दोकलम विवाद का असर

डोकलाम
यात्रियों ने बताया कि चीन में प्रवेश करने के बाद कड़ी निगरानी शुरू हो जाती है। बसों में भी सीसीटीवी लगाए गए हैं।

फोटोग्राफी पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यात्रियों के मुताबिक इस मामले का यात्रियों की सुरक्षा से लेना देना कम ही नजर आया।

हर कदम पर निगरानी का तंत्र चीन ने विकसित किया हुआ है। यह शायद दोकलम विवाद का असर है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें