भारत-चीन युद्ध और डोकलाम को लेकर चीन की एक और हकीकत सामने आई है। आगे पढ़िए...
वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के संबंध में जो लोग यह तर्क देते हैं कि चीनी फौज की अगली टुकड़ी के पास ही सिर्फ हथियार रहते थे, उसके पीछे खाली हाथ लोग मरने वालों का हथियार उठाकर लड़ने लगते थे, वे गलत हैं। सत्य तो यह है कि चीन ने बहुत ही सटीक रणनीति से यह युद्ध लड़ा।
तिब्बत में हुए विद्रोह को कूटनीति के तहत भारत को जोड़ा। इस युद्ध के बाद ही डोकलम विवाद की पृष्ठभूमि तैयार कर ली गई थी। भारत-चीन युद्ध के संबंध में वैली ऑफ वर्ड्स के सत्र में मेजर जनरल (सेवा निवृत्त) पीजेएस संधू ने यह बात साझा की।
इस संबंध में उन्होंने पुस्तक भी लिखी है। ‘ट्रेडिंग पार्टनर्स एंड वॉरिंग नेबर्स’ सत्र के दौरान उन्होंने वर्ष 1962 के इस युद्ध ‘सीमा आपदा’ की संज्ञा दी और बताया कि चीन की रणनीति सोची-समझी और सटीक रही।
इस तरह से लड़ा गया था युद्ध
demo pic
युद्ध का कारण चीन ने वर्ष 1959 में तिब्बत में हुए विद्रोह को बनाया। दलाई लामा अपने समर्थकों के साथ भारत आ गए। नवंबर 1959 तक सीमा के मामले विदेश मंत्रालय के पास थे और देश का सुरक्षा बजट 0.52 प्रतिशत रहा है।
उस वक्त देश के पास कोई हिमालयी सैन्य डिवीजन नहीं रहे। युद्ध के लिए लद्दाख और सिक्किम को फ्रंट बनाया गया था। फौज पुलिस की तरह यहां लाई गई। यह युद्ध तीन चरणों में लड़ा गया था। लद्दाख से फिर चीन सेना वापस नहीं गई।
चीन के राष्ट्राध्यक्ष खुद इसे देख रहे थे। अगर एयर फोर्स को युद्ध में लाया गया होता तो नतीजा दूसरा होता। चीन ने भी इसमें एयरफोर्स को नहीं लगाया था। इस युद्ध में चीन भारत को ‘नेगोशिएटिंग टेबल’ पर लाने में सफल हो गया। डोकलम विवाद भी इसी शृंखला की एक कड़ी है।
अमेरिका से भी अमीर हो जाएगा चीन
indian china war 1962
- फोटो : File Photo
सत्र में विशेषज्ञ मोहन गुरुस्वामी ने बताया कि वर्ष 2024 तक चीन का सैन्य बजट अमेरिका से अधिक हो जाएगा। चीन ने अपनी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत कर ली है। उत्पादों को असेम्बल करने के मामले में वब दुनिया का सबसे बड़ा ‘एग्रीगेटर’ हो गया है।
भारत से चीन का सालाना कारोबार 104 बिलियन डॉलर का है। इसमें 74 फीसदी निर्यात चीन का है। इस मौके पर लेखक अरविंदर सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। सत्र की अध्यक्षता पूर्व आईएफएस रंजीत गुप्ता ने की।