कैलाश के दर्शन कर लौटे 12वें दल के यात्री वीरेंद्र कुमार त्यागी और सुचेता पारेकर ने बताया कि तकलाकोट में शौचालय की सुविधा थी।
डेरापुक में शौचालय नहीं होने से खुले में शौच करना पड़ा। मानसरोवर झील के पास बनाए गए शौचालय बहुत गंदे थे। यात्री चीन के पोनी-पोर्टरों की कार्यप्रणाली से भी नाराज दिखाई दिए।
यात्रियों ने बताया कि पोनी लापरवाही से घोड़े-खच्चरों को चला रहे थे। दुर्गम पैदल मार्गों पर पोनी ज्यादा समय अपने मोबाइल फोन से खेलते रहते थे। इससे उनके दल के कुछ यात्री घोड़े से गिरकर घायल भी हुए थे। यात्रियों ने भारतीय पड़ावों पर केएमवीएन की व्यवस्थाओं के साथ ही आईटीबीपी और भारत के पोनी-पोर्टरों की जमकर तारीफ की।