नाबालिग की शादी के लिए दस्तावेजों में किया गया था फेरबदल
नाबालिग की शादी कराने के लिए उसके जन्म प्रमाणपत्र सहित कई अन्य दस्तावेजों में फेरबदल किया गया था। बीते वर्ष नवंबर माह में नाबालिग का जन्म प्रमाणपत्र हरिद्वार के चैनराय महिला चिकित्सालय में बनाया गया है जिसमें नाबालिग की जन्म तिथि 12 फरवरी 2003 अंकित है। जबकि शादी के पंजीकरण के लिए सब रजिस्टार कार्यालय में जमा परिवार रजिस्टर की नकल में नाबालिग की जन्म तिथि 1 जनवरी 1998 अंकित है। विद्यालयी अभिलेखों में नाबालिग की जन्म तिथि 19 फरवरी 2007 है जिसके आधार पर इसकी उम्र 16 साल 18 दिन है।
सब रजिस्ट्रार कार्यालय में कराया था शादी का पंजीकरण
वर्ष 2016 से अब तक नौ मामले
जनपद उत्तरकाशी में वर्ष 2016 से अब तक बाल विवाह के 9 मामले आए हैं जिन्हें चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से प्रशासन ने रुकवाया है। वर्ष 2016 में 2 वर्ष 2017 में 2, वर्ष 2018 में 1, वर्ष 2020 में 1, वर्ष 2021 में 2 व वर्ष 2022 में अभी तक 1 मामला सामने आया है जिसमें ब्लॉक डुंडा, चिन्यालीसौड़ व भटवाड़ी के तीन-तीन मामले शामिल हैं। कई मामलों में स्वयं नाबालिगों ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन कर उनकी शादी कराने की सूचना दी थी। चाइल्ड हेल्पलाइन के कार्यक्रम समन्वयक दीपक उप्पल ने बताया कि ऐसे मामलों में स्थानीय लोगों का सहयोग महत्वपूर्ण होता है लेकिन स्थानीय का अपेक्षाकृत सहयोग नहीं मिल पाता है।
- सभी दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी। जिस अस्पताल से जन्म प्रमाण पत्र लिया गया है। वहां से भी जानकारी जुटाई जाएगी। गलत प्रमाण पत्र बनाने वालों पर कार्रवाई होगी। -अभिषेक रूहेला, डीएम उत्तरकाशी।