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उत्तराखंड के सभी जिलों में शुरू होगी बाल श्रम परियोजना

Sun, 12 Jun 2016 01:20 PM IST
नवीन सक्सेना-दीपक सिंह नेगी / अमर उजाला, हल्द्वानी
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- फोटो : concept photo
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भारत सरकार ने उत्तराखंड के सभी जिलों में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना शुरू किए जाने के संबंध में श्रम विभाग से प्रस्ताव मांगा है।
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विभाग ने परियोजना के संबंध में विस्तृत कार्ययोजना के साथ प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया है। इस परियोजना को मंजूरी मिलने पर प्रदेश के सभी 13 जनपदों में बाल श्रम स्कूल खोले जाएंगे, ताकि चिह्नित बाल श्रमिकों को बाल श्रम स्कूल में पुनर्वास के लिए भेजा जा सके।

प्रदेश में रुद्रपुर, सितारगंज और हरिद्वार में सिडकुल स्थापित किए गए हैं। इन क्षेत्रों के अलावा शहरों में भी खतरनाक और गैर खतरनाक व्यवसायों में बाल श्रमिक काम करते हुए देखे जा सकते हैं।
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श्रम विभाग द्वारा समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है, मगर यह सिर्फ औपचारिक ही रहता है। जो बाल श्रमिक चिह्नित भी होते हैं, उनमें से भी कई बाल श्रमिकों के 14 वर्ष से अधिक आयु के प्रमाणपत्र आने के बाद वे भी मुक्त हो जाते हैं। 

कुमाऊं परिक्षेत्र के उप श्रमायुक्त अनिल पेटवाल ने बताया कि बाल श्रम पर सख्ती से रोक लगाई जा सके, इसके लिए भारत सरकार ने प्रदेश के सभी 13 जिलों में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना शुरू करने के संबंध में प्रस्ताव मांगा था, जिसे तैयार कर भारत सरकार को भेज दिया गया है।

उन्होंने बताया कि अभी तक यह बाल श्रम परियोजना केवल देहरादून में चल रही है। इसी तरह यह परियोजना प्रत्येक जिले में शुरू की जानी है। उन्होंने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में अभी तक कोई बाल श्रमिक चिह्नित नहीं हुआ है। बाल श्रमिकों को चिह्नित करने के लिए शीघ्र सर्वे किया जाएगा।

प्रदेश में 107 चिह्नित हैं बाल श्रमिक
- नैनीताल-5 
- ऊधमसिंह नगर-53
- देहरादून-19
- चमोली-4
- हरिद्वार-9
- पौढ़ी गढ़वाल-17

अधिकांश में आयु प्रमाणपत्र आने से खत्म हो जाते हैं केस
श्रम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2015-16 में कुमाऊं में 58 और गढ़वाल मंडल में 49 बाल श्रमिक चिह्नित हुए थे। नैनीताल जिले में चिह्नित पांच बाल श्रमिकों में केवल एक प्रकरण में सेवायोजक के खिलाफ कार्रवाई हुई। ऊधमसिंह नगर में चिह्नित 53 बाल श्रमिकों में से 49 बाल श्रमिक खतरनाक एवं 4 बाल श्रमिक गैर खतरनाक प्रक्रिया में चिह्नित किए गए थे।

49 बाल श्रमिकों से 23 प्रकरणों में चिकित्सा प्रमाणपत्र के आधार पर कार्यवाही समाप्त हो गई तथा 15 प्रकरणों में उम्र परीक्षण का मामला फंसा है। देहरादून में 19 बाल श्रमिकों में से 7 प्रकरणों में आयु प्रमाणपत्र आने पर कार्यवाही समाप्त हो गई। बाकी मामलों में कार्यवाही चल रही है। 

बाल श्रम पर एक माह की सजा
बाल श्रम (प्रतिबंध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अनुसार किसी भी प्रतिष्ठान में 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के खतरनाक कामों में लिप्त पाए जाने पर प्रतिष्ठान के मालिक एवं संबंधित व्यक्ति को एक माह की सजा और एक हजार जुर्माने का प्रावधान है। 
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प्रदेश सरकार की वेबसाइट अपडेट नहीं
डिजिटल इंडिया के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट अपडेट नहीं है। जिससे सरकारी आंकड़ों की सही जानकारी मिलना मुश्किल है। श्रम विभाग की वेबसाइट में बाल श्रमिकों के आंकड़े 2013 तक के हैं। वेबसाइट पिछले तीन सालों से अपडेट नहीं की गई है।
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