राजधानी के लक्खीबाग क्षेत्र की दरभंगा बस्ती में कुछ दिन पूर्व दो बच्चों में से एक की मौत डेंगू से हुई थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग लगातार मामले को दबाने में जुटा रहा। विभागीय अधिकारी किसी भी डेंगू पीड़ित की मौत से इंकार करते रहे। हालांकि, बृहस्पतिवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और एक पीड़ित की डेंगू से मौत की पुष्टि की। साथ ही स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि यह प्रदेश में डेंगू से अब तक की पहली मौत है।
13 अगस्त को दरभंगा बस्ती निवासी दिनेश दास के बेटे राजा (10) की तबीयत बिगड़ गई। मौके पर पहुंची आशा कार्यकत्री ने उसे उल्टी-दस्त की दवा दी। 14 अगस्त को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उसे दून अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया।
परिजन उसे पटेलनगर के किसी प्राइवेट क्लीनिक ले गए, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ऐसी किसी घटना से लगातार इनकार करता रहा। बच्चे की मौत के तीन दिन बाद तक भी विभाग मानने को तैयार नहीं हुआ कि बच्चे की मौत डेंगू से हुई है।
बुधवार शाम स्थानीय लोगों ने इसके विरोध में वहां जाम लगा दिया और विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में स्थानीय लोग डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचने की जहमत तक नहीं उठाई।
अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में यह मामला प्रकाशित किया तो विभागीय अधिकारियों ने मौत की बात स्वीकारी। प्रभारी सीएमओ डॉ. वाईएस थपलियाल ने राजा की मौत डेंगू से होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज से बच्चे को किन परिस्थितियों में रेफर किया गया और उसे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सूचीबद्ध अस्पताल में रेफर क्यों नहीं किया गया, यह तथ्य जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।