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देवभूमि की तरह ही आचरण करें यहां के विधायक: सीएम त्रिवेंद्र

Fri, 27 Oct 2017 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राजनीतिक जीवन में छवि का बड़ा महत्व है। देश के लोगों में उत्तराखंड की छवि देवभूमि की है। लिहाजा, विधायकों का आचरण और चरित्र भी देवभूमि की छवि के अनुरूप होना चाहिए। उन्हें देवभूमि की तरह आचरण करना चाहिए।    
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मुख्यमंत्री शुक्रवार को विधानसभा के प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। दो दिन तक चले इस कार्यक्रम का समापन हो गया। समापन से पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक एवं विधायी जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विधायकों की औसत आयु 47 साल है और 30 फीसदी विधायक पहली बार चुनकर आए हैं। वैसे तो विधायक अनुभव से सीखता है लेकिन प्रबोधन कार्यक्रम नव निर्वाचित विधायकों के लिए विशेष अवसर की तरह होता है।

उन्होंने विधायकों को सुझाव दिया कि राजनीतिक जीवन में छवि का बड़ा महत्व है। कई बार विधायक के प्रति धारणा बन जाती है कि उन्हें अहंकार हो गया है। बेशक विधायक ईमानदार हो, मेहनती हो, लेकिन उसके बारे में एक छवि बन गई कि वह किसी काम का नहीं है या वह आदमी तो काम का है, लेकिन उसकी भाषा बहुत खराब है’ तो फिर ऐसी धारणा को तोड़ना उसके लिए मुश्किल हो जाता है।
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इसलिए विधायक को अपने आचरण और व्यवहार के प्रति सतर्क रहना चाहिए और लोगों से खुद को जोड़े रखना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम से विधायक लाभान्वित हुए होंगे। उन्होंने प्रबोधन कार्यक्रम में विशेष वक्ता के रूप में आए अतिथियों का भी आभार प्रकट किया।
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अच्छा और प्रभावी विधायक बनने की टिप्स दे गए दीक्षित

उत्तरप्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने अच्छे और प्रभावी विधायक बनने की टिप्स दी। उन्होंने कहा कि इस बारे में बेशक कोई किताब नहीं है, लेकिन अनुभव के आधार पर वह कह सकते हैं कि पहली बार चुने विधायकों को छवि और धारणा को लेकर ज्यादा चौकन्ना रहने की आवश्यकता होती है। नए विधायकों को कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के लोग टेढ़ी नजर से देखते हैं। वह उत्तराखंड विधान सभा के प्रबोधन कार्यक्रम के दूसरे दिन संसदीय शिष्टाचार एवं समसायिक विषयों पर सदस्यों की भूमिका के  विषय पर विचार व्यक्त कर रहे थे।

उन्होंने विधायकों को सदन के भीतर और बाहर अच्छा और प्रभावी बनने की टिप्स दी। उन्होंने कहा कि विधायक को समय प्रबंधन करना चाहिए। मोबाइल आने से कठिनाई बढ़ी है। वरिष्ठ कार्यकर्ता का सहयोग लेना चाहिए। ऐसे कार्यकर्ताओं वह सूची बनाएं। ऐसा अनुभव है कि दिन भर व्यस्त रहने के बावजूद विधायक से मिलने क्षेत्र के एक प्रतिशत लोग भी नहीं आते। इसलिए विधायक को प्रतिदिन ऐसा कार्यक्रम बनाना चाहिए ताकि उसकी क्षेत्र के लोगों से बातचीत होती रहे।

उन्होंने कहा कि सदन के अंदर प्रश्नों, प्रस्तावों और कार्यवाही में सक्रिय भूमिका से विधायक छवि बनती है। लेकिन यह तभी संभव है जब विधायक को संसदीय नियमों और परंपराओं का ज्ञान हो। इसलिए विधान सभा के पुस्तकालय की सामग्री का अध्ययन की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बजट के प्रति सदस्यों की अरुचि देखने को मिलती है। लेकिन बजट के साथ दी गई सामग्री कोई कचरा नहीं होता अपितु वह सामग्री बहुत उपयोगी होती है।
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