फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का ही स्वास्थ्य खराब

Sun, 16 Jul 2017 10:58 AM IST
राजीव शुक्ला/ अमर उजाला, हल्द्वानी
विज्ञापन
Money
विज्ञापन
गरीबों के इलाज के लिए चल रही मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का ही स्वास्थ्य खराब हैं। योजना को इलाज की आवश्यकता है। सुशीला तिवारी अस्पताल, बेस और महिला अस्पताल हल्द्वानी में सवा करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान नहीं हुआ है। पिछली और वर्तमान कंपनियों ने कई मामलों में पेच फंसा दिया और केस वापस कर दिए हैं।
विज्ञापन


मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने की थी। योजना की शुरुआत में गरीब एवं जरूरतमंदों को इलाज के लिए 50 हजार रुपये मिलते थे। बाद में इस राशि को बढ़ाकर 1 लाख 75 रुपये कर दिया गया था। इसके तहत 50 हजार रुपये में सामान्य बीमारियों का इलाज और सवा लाख रुपये गंभीर बीमारी के लिए रखा गया है।

सूत्रों की मानें तो बीमा योजना के दूसरे टर्म एक जुलाई 2016 से सुशीला तिवारी अस्पताल में 3,467 मरीज आए और तीन करोड 74 लाख रुपये का बिल बना। इसमें 2,787 केस रिपोर्ट किए गए और दो करोड़ 85 लाख रुपये की धनराशि का भुगतान करने के लिए बीमा कंपनी से कहा गया। कंपनी 2,391 केस के एक करोड़ 29 लाख का भुगतान किया। शेष भुगतान नहीं किया है।
विज्ञापन


जबकि 219 केस रिजेक्ट कर दिए और 29 लाख रुपये का भुगतान भी अटक गया। 2015 में शुरू हुई योजना में सिर्फ 50 हजार रुपये का इलाज निशुल्क था। पहले टर्म में एसटीएच 3,795 मरीजों के प्रपत्र तैयार किए गए और तीन करोड़ 27 लाख रुपये का भुगतान होना था। 3,677 मरीजों का दो करोड़ 32 लाख रुपये का भुगतान हुआ जबकि 389 केस बीमा कंपनी ने रिजेक्ट कर दिए और नौ लाख 71 हजार रुपये से एसटीएच को हाथ धोना पड़ा।

बेस अस्पताल में दूसरे टर्म में 1,441 केस के प्रपत्र तैयार किए गए और 66 लाख रुपये का भुगतान होना था। 1,207 केस के अनुरूप 34 लाख 70 हजार रुपये भुगतान हुए। जबकि 158 मामले रिजेक्ट किए गए और आठ लाख 53 हजार रुपये का भुगतान नहीं हुआ। शेष राशि का भुगतान अभी अटका हुआ है।

महिला अस्पताल हल्द्वानी में 104 केस के प्रपत्र तैयार किए गए और पांच लाख 45 हजार रुपये का भुगतान होना था। 89 केसों का चार लाख 83 हजार रुपये भुगतान किया गया। जबकि 63 केस का 63 हजार रुपये रिजेक्ट कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो जो केस रिजेक्ट हुए उसमें प्रपत्र भरने में अस्पताल स्तर पर भी कुछ गड़बड़ी हुई है साथ ही बीमा कंपनी ने भी पेच लगाकर कई मामले लटका दिए हैं। 

बीमा कंपनियों से भुगतान का प्रयास किया जा रहा है। पहले टर्म में दूसरी मेडिकल कंपनी मामले देख रही थी जबकि दूसरे टर्म की योजना में दूसरी कंपनी को काम दिया गया है। अस्पताल प्रशासन बीमा कंपनी की ओर से लगाई गई आपत्तियों के जवाब भेज रहा है। भुगतान के लिए पुराने और नई दोनों कंपनियों से बात की जाएगी। 
विज्ञापन

- डॉ. अमलेश सिंह, कार्यक्रम अधिकारी, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें