नहाय-खाय के साथ ही सोमवार से छठ व्रत की शुरुआत हो गई। बिहारी महासभा की ओर से छठ पर्व की तैयारियों के मद्देनजर रविवार को टपकेश्वर स्थित तमसा नदी, घाटों और मेला स्थल की सफाई की गई।
सोमवार को नहाय-खाय के साथ ही चार दिवसीय छठ व्रत की शुरुआत होगी। रविवार को बाजार में इस व्रत के लिए लोगों ने टोकरी, सूप आदि की खरीदारी की। सोमवार को व्रत रखने वाले लोग घरों की सफाई करेंगे। इसके बाद दोपहर के समय लौकी-भात खाया जाएगा।
28 अक्तूबर को खरने का आयोजन होगा। इस दिन गुड़ की खीर बनाकर शाम सात बजे खाई जाएगी। 29 अक्तूबर को शाम को (सूर्यास्त के समय) पहला अर्घ्य दिया जाएगा। इसके साथ ही 30 अक्तूबर को सुबह (सूर्योदय) के समय दूसरे अर्घ्य के साथ ही छठ व्रत संपन्न होगा।
सीएम के स्वास्थ्य लाभ की करेंगे कामना
बिहारी महासभा की ओर से मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्वास्थ्य लाभ के लिए पहला अर्घ्य दिया जाएगा। सभा की ओर से छठ पूजा की छुट्टी घोषित किए जाने के लिए सीएम को धन्यवाद दिया।
सभा के अध्यक्ष सतेंद्र कुमार ने बताया कि सीएम के स्वास्थ्य कामना की मनोती के लिए इस बार छठ पूजा पर पहला अर्घ्य सूर्य देव को दिया जाएगा।
छठ पूजा के लिए बढ़ाया दायरा
महासभा की ओर से टपकेश्वर में छठ पूजा के लिए दायरे को बढ़ाया गया है। इसबार दो किमी और आगे तक सफाई की गई। हालांकि ‘तमसा को बचाना है’ अभियान के चलते तमसा नदी साफ-सुथरी मिली।
महासभा ने कार्यकर्ताओं ने घाटों की धुलाई और मेला स्थल की सफाई की। रविवार को सभा की ओर से चले सफाई कार्य में विधायक गणेश जोशी ने भी हिस्सा लिया।
ये है महत्व
छठ व्रत पहले तक पुत्र की कामना के लिया किया जाता था, लेकिन समय बदला तो लोग अब पुत्र या पुत्री नहीं बल्कि संतान की कामना के लिए व्रत करने लगे हैं। त्वचा रोगों से मुक्ति या अन्य किसी भी प्रकार की मन्नत के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
यहां दिया जाएगा अर्घ्य
टपकेश्वर मंदिर, रायपुर माल देवता के पास, माजरा, पथरीबाग आदि।