देहरादून। स्वरोजगार योजना के तहत स्वीकृत धनराशि का चेक डाक विभाग की लापरवाही से बैंक नहीं पहुंचा। जबकि, लाभार्थी पर ब्याज लगता रहा। उपभोक्ता फोरम ने डाक विभाग को इस ब्याज का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा डाक विभाग मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद खर्च भी लाभार्थी को अदा करेगा।
मामला वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना से जुड़ा है। चंद्रशेखर जोशी निवासी आर्केडिया ग्रांट को 1.83 लाख रुपये इस योजना के तहत अक्तूबर 2016 में स्वीकृत हुआ था। क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय से यह चेक बैंक ऑफ इंडिया की बड़ोवाला शाखा को भेज दिया गया, लेकिन जोशी को चेक नहीं मिला। इस पर जोशी ने खोजबीन की तो पता चला कि चेक कचहरी स्थित पोस्ट ऑफिस से रजिस्ट्री के माध्यम से पोस्ट ऑफिस बड़ोवाला भेजे गए थे।
यहां जोशी के सामने जो कहानी आई वह चौंकाने वाली थी। बड़ोवाला पोस्ट ऑफिस की डाकपाल की मृत्यु हो गई थी। इसके कारण वहां के कर्मचारी को डाकपाल और डाकिया दोनों का काम करना पड़ रहा था। कार्य की अधिकता होने के कारण उसने यह चेक वापस पर्यटन अधिकारी कार्यालय भेज दिया। चार माह बाद इस चेक की वैधता समाप्त हो गई। ऐसे में जोशी को नया चेक जारी किया गया। इस पूरे प्रकरण में फोरम ने माना कि यदि तय समय के भीतर डाकपाल की नियुक्ति होती तो समय से चेक बैंक पहुंचता और लाभार्थी को मिल जाता। सेवा में कमी डाक विभाग की ओर से हुई है। ऐसे में उसे ही ब्याज के 21 हजार रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति के डेढ़ हजार रुपये और वाद खर्च भी देना होगा।