हरिद्वार जिले के कई निजी तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में छात्रवृत्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। समाज कल्याण के कर्मचारियों की मिलीभगत से शिक्षण संस्थाओं ने अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्तियों में 10 करोड़ रुपये का गोलमाल किया है।
समाज कल्याण निदेशक ने फर्जीवाड़े की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
छात्रवृत्ति के नाम पर हड़पी मोटी रकम
शिक्षण संस्थाओं पर ओबीसी छात्रों को अनुसूचित छात्र दिखाकर समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति के नाम पर मोटी रकम लेने का आरोप है।
यह भी आरोप लगा है कि लंबे समय से चल रहे शिक्षण संस्थाओं के फर्जीवाड़े में समाज कल्याण के भी कई कर्मचारी शामिल हैं। जिला महासचिव कांग्रेस कमेटी हरिद्वार ने जिले के कई निजी तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के छात्रवृत्ति में किए फर्जीवाड़े की शिकायत राज्यपाल की थी।
पूछताछ करने के भी निर्देश
शिकायती पत्र में कई बिंदुओं पर जांच कराने की मांग की गई थी। इस पर राज्यपाल के अनुसचिव घनश्याम शर्मा ने प्रमुख सचिव एस राजू को पत्र लिखकर जांच कराने के निर्देश जारी किए।
प्रमुख सचिव के निर्देश पर निदेशक विनोद कुमार सुमन ने हरिद्वार की शिक्षण संस्थाओं के खिलाफ जांच बैठाई है। निदेशक ने जांच कमेटी के सदस्यों से संबंधित अधिकारी से पूछताछ करने के भी निर्देश दिए हैं।
ये कमेटी करेगी जांच
निजी तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में छात्रवृत्ति के फर्जीवाड़े की जांच समाज कल्याण के उप निदेशक एनके शर्मा, वित्त अधिकारी पीएल शैल और त्रिलोक सिंह रावत करेंगे। संयुक्त निदेशक (समाज कल्याण) ब्रह्मपाल सिंह सैनी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है।