कुछ दिनों पहले तक मुख्यमंत्री हरीश रावत का फोकस इस बात पर था कि चारधाम यात्रा की सटीक व्यवस्था कर ली जाएगी। अब सीएम रावत कह रहे हैं कि सुविधाएं जुटाने में रहते तो यात्रा शुरू ही न करवा पाते।
जून 2013 की आपदा के बाद 11 सिंतबर को केदारनाथ में पूजा पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने की थी। कपाट उस समय तक बंद नहीं हुए थे। इसके बाद पांच मई 2014 को कपाट खुले पर इस बात को लेकर संशय था कि इन हालातों में यात्रा चल भी पाएगी या नहीं।
प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद हरीश रावत ने कमान संभाली और पहले दिन से ही रावत का जोर यात्रा को शुरू करने पर था। उस समय यह भी माना गया था कि चार धाम यात्रा को शुरू करवाकर सरकार मनोवैज्ञानिक बढ़त भी हासिल करना चाहती है। पर आपदा से जिस कदर नुकसान हुआ था उससे यात्रा व्यवस्था को पटरी पर लाना आसान नहीं था।
पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर फोकस
इन परिस्थितियों के बीच में देर से ही सही पर यात्रा को कुछ हद तक सरकार शुरू भी करवा पाई। हालांकि यात्रा पर फोकस की वजह से पुनर्वास और अन्य मसले भी किनारे रह गए।
इन्हीं सब बातों को देखते हुए यह सुझाव भी था कि यात्रा को एक साल के लिए स्थगित किया जाए। ताकि सरकार पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर फोकस कर पाए।
पर रावत ने इस सुझाव को दरकिनार कर चार धाम यात्रा को शुरू करने पर ही फोकस किया। ऐसे में विपक्ष को चार धाम यात्रा की खामियों पर हल्ला मचाने का मौका तो मिला पर चार धाम यात्रा शुरू हो जाने के कारण विपक्ष खुलकर हमलावर नही हो पाया।
इस बार के लिए सुविधाएं जुटाने में रहते
अब मुख्यमंत्री हरीश रावत को स्वीकार करना पड़ रहा है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सुविधाएं जुटाने पर ही रहते तो यात्रा शुरू ही नहीं करवा पाते। हरीश रावत के मुताबिक यात्रा शुरू ही इसलिए की गई जिससे अगले साल की यात्रा सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकता।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केदारनाथ पहुंचकर यात्रा व्यवस्था और पुनर्निर्माण कार्य का जायजा भी लिया था। उन्हें शाम चार बजे तक देहरादून लौट आना था पर मौसम खराब होने की वजह से उनके हैलीकाप्टर को श्रीनगर में फोर्स लैंडिंग करनी पड़ी। शाम साढ़े छह बजे तक वे देहरादून लौट भी आए।
मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक केदारनाथ में मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य का जायजा लिया और आपदा प्रभावितों से बात की। मुख्यमंत्री के मुताबिक केदारनाथ में बेस कैंप से केदार धाम तक केबल कार का संचालन किया जाएगा और लिंचौली से केदारनाथ तक रोप वे का सर्वे किया जा रहा है। रावत के मुताबिक यात्रा को अगले एक साल तक पूरी तरह से पटरी पर लाया जा सकेगा।