लिहाजा इनको 14 दिन के लिए क्वारंटीन भी किया जाएगा। चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगांई ने बताया कि इन लोगों को चमोली या जोशीमठ में क्वारंटीन करके रखा जाएगा। इसी के साथ यह भी तय कर लिया गया है कि कपाट खुलने के दौरान होने वाली रस्मों में केवल बेहद जरूरी लोग ही शामिल होंगे।
वहीं, मंदिरों के कपाट तो मुहूर्त के अनुसार तय तिथियों पर खोल दिए जाएंगे, लेकिन भगवान के दर्शनों के लिए भक्त कब उनके धाम पर पहुंचेंगे, अभी तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं है।
पिछले साल आए थे 42.56 लाख तीर्थयात्री
साल 2019 में 42 लाख 56 हजार तीर्थयात्री चारधाम यात्रा के लिए आए थे। इसमें हेमकुंड साहिब और पिरान कलियर के यात्री भी शामिल थे। वर्ष 2013 में दैवीय आपदा के बाद से चारधाम यात्रा पूरी तरह से पटरी से उतर गई थी। उसके बाद राज्य सरकार के प्रयास और यात्रियों की अगाध आस्था के बल से चारधाम यात्रा ने अपनी पुरानी गति पकड़ी थी।