-14 मई को भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से अपने धाम के लिए प्रस्थान करते हुए पहले पड़ाव फाटा पहुंचेगी।
-15 मई को बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली फाटा से रामपुर, सोनप्रयाग होते हुए भक्तों को दर्शन देकर गौरीकुंड में रात्रि विश्राम करेगी।
-16 मई को बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली गौरीकुंड से प्रस्थान करते हुए जंगलचट्टी, भीमबली, रामबाड़ा, लिनचोली, रुद्रा प्वाइंट होते हुए 17 किमी का सफर तय कर अपने धाम केदारनाथ पहुंचेगी।
केदारनाथ के लिए बागेश लिंग पुजारी नियुक्त
17 मई से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा में बागेश लिंग धाम में छह माह तक आराध्य बाबा केदार की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी संभालेंगे। देवस्थानम बोर्ड के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि यात्राकाल के लिए द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम में शिव लिंग, ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में टी-गंगाधर लिंग और विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में शशिधर लिंग पूजा-अर्चना करेंगे। जबकि शिव शंकर लिंग को अतिरिक्त पुजारी के तौर पर रखा गया है।
पूर्णस्वर्ण मुकुट होगा सुशोभित
ज्योतिर्लिंग केदारनाथ पर इस बार पूर्णस्वर्ण मुकुट पहनाया जाएगा। रावल भीमाशंकर लिंग ने बताया कि पूर्णस्वर्ण मुकुट को परंपरागत तरीके से बंगलूरू में बनाया गया है। यह मुकुट यात्राकाल में उत्सव मूर्ति के साथ केदारनाथ ज्योतिर्लिंग पर सुशोभित होगा।
भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन
ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में भक्तों के लिए भंडारा का आयोजन किया गया है। हंस फाउंडेशन के सहयोग से अधिवक्ता संजय शर्मा दरमोड़ा, दिल्ली निवासी प्रेम रस्तोगी, अनिल गोयल, नरोत्तम गर्ग एवं श्याम सुंदर शर्मा द्वारा भक्तों के लिए दूध, फल व मिष्ठान को प्रसाद रूप में भंडारा आयोजित किया।
पंच केदारों में चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट 17 मई को ब्रह्ममुहूर्त में भक्तों के लिए खुल जाएंगे। रुद्रनाथ मंदिर समिति की ओर से मंदिर के कपाट खोलने की तिथि निश्चित की। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष व रुद्रनाथ-गोपीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट ने बताया कि इस वर्ष रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 17 मई को ब्रह्ममुहूर्त में खोले जाएंगे।
गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में 14 मई से रुद्रनाथ मंदिर के कपाट खोले जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। समुद्रतल से 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर में भोलेनाथ के मुख के दर्शन होते हैं। गोपेश्वर के सगर गांव से से लगभग 24 किमी की दूरी पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर भव्य प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण है। मंदिर तक पहुंचने वाला आस्था पथ सुरभ्य बुग्यालों के बीच से होकर गुजरता है।
पंच केदारों में सर्वश्रेष्ठ धाम केदारनाथ है। यहां भोलेनाथ के पश्चभाग के दर्शन होते हैं, जबकि द्वितीय केदार मद्महेश्वर में नाभि के, तृतीय केदार तुंगनाथ में भुजा, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ में मुख और पंचम केदार कल्पेश्वर में शिव की जटाओं के दर्शन होते हैं।