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उत्तराखंडः बदरीनाथ में बहा 12 मी. हाईवे, दो घंटे बाधित रही बदरी-केदार यात्रा

Sun, 04 Aug 2019 10:17 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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बदरीनाथ हाईवे - फोटो : अमर उजाला
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भारी बारिश के कारण मलबा और पत्थर आने से बदरीनाथ और केदारनाथ में हाईवे बंद हो गए, जिससे यात्रा दो घंटे तक बाधित रही। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ही रोक दिया। वहीं हेमकुंड साहिब में लक्ष्मण गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण पुलिया का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस प्रशासन ने यहां से आवाजाही रोक दी है। वहीं रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी में 23 सड़कें बंद पड़ी हैं और नदियों का जलस्तर भी बढ़ गया है।

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बदरीनाथ हाईवे भारी बारिश के कारण कंचनगंगा नदी में करीब 12 मीटर तक बह गया है। हाईवे बंद होने पर बदरीनाथ की यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्रियों और यात्री वाहन को देवदर्शनी और लामबगड़ में रोक दिया गया। हालांकि दो घंटे बाद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से हाईवे सुचारु तो कर दिया गया, लेकिन कंचनगंगा में वाहनों के टायर फंस रहे हैं। कंचनगंगा में हाईवे के चौड़ीकरण के तहत बीआरओ की ओर से लगाए गए तीन ह्यूम पाइप भी बह गए हैं।

लक्ष्मण गंगा का जलस्तर बढ़ा

वहीं हेमकुंड साहिब क्षेत्र में लक्ष्मण गंगा का जलस्तर बढ़ने से भ्यूंडार गांव के समीप पुलिया का एक ओर का अबेटमेंट क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस प्रशासन की ओर से पुलिया से तीर्थयात्रियों की आवाजाही बंद करा दी गई है। तीर्थयात्रियों को समीप ही स्थित झूला पुल से हेमकुंड साहिब भेजा जा रहा है। इस पुल से घोड़े-खच्चरों की आवाजाही भी सीमित रूप से करवाई जा रही है।

रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग भीमबली-लिनचोली के बीच बंद गया जिस कारण यात्रा को दो घंटे तक रोकना पड़ा। पैदल रास्ते पर दिनभर घोड़ा-खच्चरों की आवाजाही नहीं हुई। ऐसे में कई श्रद्धालुओं को पड़ावों पर ही रुकना पड़ा। लोगों को हाथ पकड़कर रास्ता पार करवाना पड़ा। वहीं भूस्खलन के कारण रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग बार-बार बाधित होता रहा। इस दौरान स्थानीय व सवारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

हल्की बारिश के साथ जारी है सड़कों के अवरुद्ध होने का सिलसिला 

उत्तरकाशी जिले के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर हल्की बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश से भूस्खलन के कारण ओजरी डबरकोट यमुनोत्री हाईवे और बड़ेथी चुंगी गंगोत्री हाईवे के लिए नासूर बना हुआ है। जबकि भूस्खलन से जिले में पांच संपर्क मार्ग भी बाधित हुए।

मानसून सीजन में जिले के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर हल्की बारिश का सिलसिला बना हुआ है। हालांकि अभी तक जिले में अतिवृष्टि की स्थिति नहीं आयी है। बारिश में भूस्खलन सक्रिय होने के कारण ओजरी डबरकोट वाले हिस्से में यमुनोत्री हाईवे बार-बार अवरुद्ध हो रहा है। शनिवार को यहां यातायात सुचारू तो रहा, लेकिन दलदली सड़क और पहाड़ी से बोल्डर गिरने के भय के बीच यहां जोखिम बना हुआ है। गंगोत्री हाईवे पर भी बड़ेथी चुंगी वाले हिस्से में यातायात खासा जोखिम भरा बना हुआ है।

शुक्रवार रात को हुई बारिश के चलते सौरा-सारी, नैटवाड़-सेवा, देवरा-हल्टाड़ी, खालसी-बिंगसारी तथा राजगढ़ी-सरनौल मोटर मार्ग भूस्खलन के कारण बाधित हो गए। शनिवार सुबह राजगढ़ी-सरनौल को छोड़ शेष सड़कों पर यातायात बहाल कर लिया गया। जबकि बीते 27 जुलाई से धौंतरी-ठांडी मोटर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं हो पायी है। निर्माणाधीन जखोल-लिवाड़ी मोटर मार्ग पर खेड़ाघाटी वाले हिस्से में भी अभी तक वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं हो सकी है। जिस कारण क्षेत्र के आधा दर्जन से ज्यादा गांव अलग-थलग पड़े हैं। सड़कें बार-बार अवरुद्ध होने के कारण क्षेत्र के ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

भारी बारिश के बीच तीन मार्ग बंद, 12 गांव का संपर्क कटा 

चकराता क्षेत्र में देर रात से जारी भारी बारिश के बीच तीन संपर्क मार्गों पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। जिससे करीब 12 गांव की आबादी का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है। फसलों से लदे वाहन सड़कों पर जगह-जगह फंसे हुए हैं। रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं भी लोगों को पीठ पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जानी पड़ रही है। 

देर रात को हुई झमाझम बारिश के बीच लोनिवि चकराता अंतर्गत खारसी और दारागाड़-कथियान-त्यूनी मोटर मार्ग बंद हो गए जबकि, पीएमजीएसवाई अंतर्गत कैलन खड्ड-डिमिच मोटर मार्ग पर भारी मात्रा में मलबा आ गया। जिससे इन सड़कों से जुड़े गांव का संपर्क अन्य इलाकों से कट गया है। रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही हैं। 

ग्रामीण राम सिंह, कल्याण सिंह, अतर सिंह, गजेंद्र सिंह का कहना है कि बरसात का मौसम आते ही लोगों की दुश्वारियां बढ़ जाती हैं। बंद मार्गों को खोलने में विभाग को कई दिन लग जाते हैं। जिसका खामियाजा आम जन को उठाना पड़ता है। उन्होंने शीघ्र सड़क से मलबा हटाने की मांग की। लोनिवि चकराता के अधिशासी अभियंता बीडी भट्ट ने कहा कि बंद मार्गों को खोलने का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही सभी मार्गों पर यातायात बहाल कर दिया जाएगा।

गंगा का जलस्तर बढ़ने पर प्रशासन सतर्क 

पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही झमाझम बारिश के चलते शनिवार को हरिद्वार जिले में गंगा का जलस्तर बढ़ता रहा। खानपुर में गंगा नदी खतरे के निशान से करीब एक मीटर नीचे बह रही है। वहीं, बाढ़ की आशंका के मद्देनजर तहसील प्रशासन भी सतर्क हो गया है। शनिवार को लक्सर एसडीम ने बालावाली के पास तटबंध का निरीक्षण किया और बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को 24 घंटे मुस्तैद रहने के निर्देश दिए।

पिछले कुछ दिनों से पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही झमाझम बारिश के चलते शुक्रवार से ही गंगा का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था। ऐसे में तहसील क्षेत्र में गंगा किनारे बसे गांव के ग्रामीणों के चिंता भी बढ़ने लगी है। कारण, यहां गंगा किनारे बना दस किमी लंबा तंटबध तीन जगहों पर ध्वस्त पड़ा है। ऐसे में यदि गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचता है तो बाढ़ का पानी टूटे तटबंध से कृषि भूमि पर फैलकर आबादी में घुसकर तबाही मचा सकता है।

शुक्रवार को जहां क्षेत्र में गंगा का जलस्तर 291.70 मीटर दर्ज किया गया था वहीं शनिवार दोपहर 12 बजे यह 292.00 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से करीब एक मीटर नीचे है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की आशंका के मद्देनजर शनिवार को लक्सर एसडीएम पूरण सिंह राणा ने बालावाली के पास तटबंध और सिंचाई विभाग की ओर से बनाई गई ठोकरों (पुश्ते) का निरीक्षण किया। साथ ही उन्होंने क्षेत्र की चारों बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को 24 घंटे मुस्तैद रहने के लिए कहा है।

इन गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा 
पंडितपुरी, रामपुर रायघाटी, महाराजपुर, कलसिया, डुमनपुरी, बालावाली, खानपुर क्षेत्र के बादशाहपुर, खानपुर, इदरीशपुर, शेरपुरबेला समेत उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला और हिम्मतपुर बेला आदि।
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हरिद्वार में कई कालोनियों के हालात बने तालाब जैस, लोग घरों में कैद

शुक्रवार की रात और शनिवार की दोपहर तक रुक रुककर हुई मूसलाधार बारिश से धर्मनगरी जलथल हो गई। कई क्षेत्रों में घरों से पानी घुस गया, जिसे निकालने में आमजन को मशक्कत करनी पड़ी। इस बरसात ने एक बार फिर हरिद्वार में ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर किए जा रहे खोखले दावों की पोल खोलकर रख दी है। शाम तक भी कई इलाकों से पानी की निकासी नहीं हो पाई थी।

शुक्रवार की देर रात शुरू हुई मूसलाधार बारिश हरिद्वार के कई क्षेत्रों में आफत लेकर आई। भगत सिंह चौक से लेकर समूचे मध्य हरिद्वार क्षेत्र में जहां शनिवार की सुबह तालाब जैसे हालात रहे। वहीं कनखल के संदेश नगर में पांच पांच फीट पानी भर गया। उत्तरी हरिद्वार में बारिश कम हुई, लेकिन ज्वालापुर और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव के कारण कोई ऐसी गली नहीं थी जहां दोपहर तक बाहर निकलने के हालात बने हो। कनखल के संदेश नगर, सर्वप्रिय विहार, लाटोवाली, कृष्णानगर, कुम्हार गढ़ा आदि कॉलोनियों में कई घरों में पानी भर गया। लोगों ने कई घंटों तक घरों से पानी निकाला। इस दौरान भूतल पर स्थित मकानों में लाखों रुपये का सामान पानी भर जाने के चलते खराब हो गया।

यह स्थिति मध्य हरिद्वार और ज्वालापुर के कड़च्छ, पांवधोई, पीठ बाजार, मोहल्ला मेहतान, ईदगाह रोड, सुभाषनगर आदि में भी दिखाई दी। शनिवार की बारिश में सबसे ज्यादा पोल सिस्टम की खोली है। अधिकतर क्षेत्रों में जल निकासी होने में कई कई घंटे लग गए, जिसकी खास वजह यह रही कि जल निकासी के अधिकतर रास्तों पर आमजन ने पहले से ही कब्जे किए हुए हैं। चंद्राचार्य चौक पर शनिवार की सुबह चार चार फीट पानी था, यहां से वाहन निकालने में पानी में इतनी ठेल लग रही थी कि दुकानों में भी पानी घुस गया, जिससे स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। 

मधु विहार कालोनी जमालपुर कलां में आज की बारिश ने जमकर कहर बरपाया। इस कालोनी में पानी की निकासी के कोई प्रबंध नहीं है। लोगों के घरों में दो दो फीट पानी भर गया। जबकि गलियों में मकान की आधी दीवारें जलथल थी। कृष्णानगर कॉलोनी में मलबे एवं गंदगी से नाले के भरे होने के चले कई घरों में पानी घुस गया। पानी घुसने से आमजन का खासा नुकसान हुआ है। क्षेत्रवासियों ने अतिक्रमण के बाद बाद मलबा न हटवाने वाले कॉलोनीवासी के घर पहुंचकर भी रोष जताया।
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