यात्रा पर जाने वाली बस का फिटनेस और ग्रीन कार्ड अनिवार्य है। ग्रीन कार्ड मिलने से पहले बस में फर्स्ट एड बॉक्स की जांच भी की जाती है। सोमवार को की गई पड़ताल से पता लगा है कि एआरटीओ कार्यालय के बाहर ही कुछ दलाल इस किट को 250 रुपये में बेचते हैं। जबकि यदि मेडिकल स्टोर से किट ली जाए तो यह 100 रुपये तक आ जाती है। ऐसे में बसों के ड्राइवर बाहर मेडिकल स्टोरों से ही फर्स्ट एड बॉक्स के लिए दवाइयां एकत्र कर लेते हैं। फर्स्ट एड बॉक्स में उल्टी, चक्कर आने, दस्त, बुखार की दवाइयां होती हैं।
यात्रा रूट पर जाने वाले वाहनों में एक्सपायरी दवाएं रखने का मामला संज्ञान में नहीं है। यह हमारे कार्यक्षेत्र में आता भी नहीं है। चूंकि सेहत से जुड़ा मामला है तो चारधाम जाने वाले वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स का निरीक्षण किया जाएगा। यात्रियों के लिए बीटीसी परिसर में स्वास्थ्य केंद्र खोला गया है।
- डॉ. एसके गुप्ता, सीएमओ देहरादून
चारधाम यात्रा पर जाने वाले वाहनों का ग्रीन कार्ड जारी करने से पहले फर्स्ट एड बॉक्स के साथ अन्य चीजों का भी निरीक्षण किया जाता है। विभाग की ओर से फर्स्ट एड बॉक्स में खाने की दवाईयां नहीं रखी जाती हैं। हमारी ओर से फर्स्ट एड बॉक्स में सिर्फ डिटॉल, बैंडेज, बरनॉल, रूई आदि को ही रखवाया जाता है।
- डॉ. अनिता चमोला, एआरटीओ
लोकल बसों में एक्सपायरी दवाइयां रखने का मामला संज्ञान में आप की ओर से लाया गया है। हालांकि रोटेशन समिति की ओर से बसों में फर्स्ट एड बॉक्स का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। बस के चालक स्थानीय प्राईवेट क्लीनिकों से दवाईयां लेकर फर्स्ट एड बॉक्स में रख रहे हैं तो सभी बसों का निरीक्षण करवाया जाएगा।
- बृजभानु प्रकाश गिरी, प्रशासनिक अधिकारी, संयुक्त रोटेशन यातायात व्यवस्था समिति