सरकार ने देर शाम आईएएस चंद्रेश यादव को देहरादून का जिलाधिकारी नियुक्त किया है।
दून की कमान चंद्रेश यादव को सौंपी
मौजूदा डीएम डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वैंकेया नायडू के एपीएस के पद पर नियुक्ति आदेश आने के बाद सरकार ने दून की कमान चंद्रेश यादव को सौंप दी।
संभावना है कि चंद्रेश गुरुवार की सुबह चार्ज लेंगे। नाम तो दौड़ में बहुत थे। वरिष्ठ नौकरशाह भी थे और जुगाड़ वाले भी। लेकिन 2006 बैच के चंद्रेश यादव ने मैदान मार लिया।
उन्हें सरकार ने बुधवार की देर शाम देहरादून का जिलाधिकारी नियुक्त किया है। जिस दिन बीवीआरसी पुरुषोत्तम केकेंद्र में जाने को राज्य सरकार ने मंजूरी दी उसी दिन से देहरादून के डीएम को लेकर दौड़ शुरू हो गई थी।
एमडीडीए के वीसी आर मीनाक्षी सुंदरम और एमडी सिडकुल शैलेश बगोली इस रेस में सबसे आगे थे। लेकिन बुधवार को मामला पूरा उलट गया। अचानक शाम को चंद्रेश यादव का नाम चलने लगा और देर शाम नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया।
CM ने चंद्रेश को पौड़ी से हटा दिया था
सरकार का देहरादून के डीएम पद पर चंद्रेश यादव को नियुक्त करने का निर्णय चौकाने वाला है। क्योंकि ठीक एक महीना पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत इतने नाराज थे कि उन्होंने बगैर इंतजार किए चंद्रेश को मतगणना के दिन ही हटा दिया था।
और, एक महीने में नाराजगी प्यार में बदल गई और चंद्रेश देहरादून के डीएम हो गए। आईएएस अफसरों केमुताबिक प्रदेश में देहरादून के डीएम की पोस्ट को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई बार इस पद पर राजनीतिक हथकंडे अपनाकर अफसर तैनाती पाते हैं तो कई को छवि के लिहाज से भी भेजा जाता है। मगर, इस बार की नियुक्ति रौचक है।
हरक सिंह रावत ने की थी चंद्रेश को हटाने जिद
सोलह मई को जब मतगणना का काम समाप्त हुआ तो मुख्यमंत्री हरीश रावत इतने नाराज थे कि उन्होंने पौड़ी के डीएम के तत्कालीन डीएम चंद्रेश यादव को हटाने के लिए एक दिन का भी इंतजार नहीं किया।
दरअसल उस समय यही चर्चा थी कि मुख्यमंत्री को लगातार पौड़ी से शिकायतें मिल रही थी इसलिए उन्होंने चंद्रेश को हटाने का फैसला लिया था।
कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने भी सीएम से चंद्रेश को हटाने की जिद की थी। यही नहीं सूत्र बताते है कि कैबिनेट की एक बैठक में हरक ने चंद्रेश को किसी मामले को लेकर खूब डांटा था।
इससे पहले भी जब चंद्रेश को पौड़ी से हटाने केआदेश हुए थे तो उस समय के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतपाल महाराज ने रुकवा लिया था। सतपाल महाराज ही चंद्रेश को पौड़ी लेकर गए थे।
लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि एक महीना पहले की चंद्रेश से हुई मुख्यमंत्री की नाराजगी के मोहब्बत में बदलने के पीछे का राज क्या है।