नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के मंच में स्थित गुरु गोरखनाथ धाम अपनी अनूठी मान्यताओं के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि धाम में सतयुग से अखंड धूनी जलती आ रही है।
श्रद्धालुओं में बांटा जाता है राख को प्रसाद के रूप में
इसी अखंड धूनी की राख को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। मंदिर की अखंड धूनी में जलाई जाने वाली बांज की लकड़ियां पहले धोई जाती हैं। धाम में नाथ संप्रदाय के साधुओं की आवाजाही रहती है।
चंपावत से 40 किमी दूर यह स्थान ऊंची चोटी पर है। यहां पहुंचने के लिए मंच तक वाहन से जाया जा सकता है। उसके बाद दो किमी पैदल चलना पड़ता है। कहा जाता है कि सतयुग में गोरख पंथियों ने नेपाल के रास्ते आकर इस स्थान पर धूनी रमाई थी।