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Chamoli News: पक्षियों के कलरव से गूंजा औली, 16 वर्ष बाद दिखा दुर्लभ बियर्डेड वल्चर

Mon, 01 Dec 2025 10:41 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, ज्योतिर्मठ (चमोली)

सार

औली की प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों को ही आकर्षित नहीं करती, बल्कि विभिन्न प्रकार के पक्षी भी यहां अपना बसेरा बनाते हैं। पक्षियों की उपस्थिति क्षेत्र की जैव विविधता के लिए अच्छे संकेत माने जा रहे हैं।
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दुर्लभ बियर्डेड वल्चर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सर्दियों में पर्यटकों से गुलजार रहने वाला औली फिलहाल विभिन्न प्रकार के पक्षियों का बसेरा बना हुआ है। औली में इन दिनों दर्जनों पक्षी नजर आ रहे हैं, जिससे विशेषज्ञ काफी उत्साहित हैं। खास बात यह है कि औली में इस साल दुर्लभ बियर्डेड वल्चर (गिद्द प्रजाति) 16 साल बाद नजर आया है। इसे विलुप्त प्रजाति में शामिल किया गया है।

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औली की प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों को ही आकर्षित नहीं करती, बल्कि विभिन्न प्रकार के पक्षी भी यहां अपना बसेरा बनाते हैं। पक्षियों की उपस्थिति क्षेत्र की जैव विविधता के लिए अच्छे संकेत माने जा रहे हैं। पक्षी प्रेमी और प्रकृति विशेषज्ञ संजय कुंवर ने बताया कि इन दिनों विंटर बर्ड वाचिंग सत्र में सुबह और शाम को अलग-अलग तरह के पक्षी नजर आ रहे हैं।

इसमें खूबसूरत श्वेत कंठ कौंडिल्ला, बेयर्ड वॉल्चर, वाइट कैप्ड रेड वाटर स्टार्ट, ग्रीन फिंच, पिंक ब्रांड फिंच, येलो ब्लू, बिल्ड मैगपाइ, ग्रे ट्री पाई प्लेन माउंटेन फिंच, अल्पाइन चाफ, ब्लैक थ्रोटेड लाफिंग थ्रश, सैटर्न नट क्रेकर, विस्कर्ड योहाना, ससेली बेस्टैड कप विंग, स्पॉट विंग्ड ग्रॉस बीक शामिल हैं। ज्यादातर पक्षी उच्च हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले हैं। बर्फबारी व ठंड बढ़ने से यह पक्षी निचले क्षेत्र में आ जाते हैं।
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अच्छे बर्ड वाचिंग के लिए शुभ संकेत
संजय कुंवर का कहना है कि पक्षियों की यह उपस्थिति भविष्य में बर्ड वाचिंग के लिए शुभ संकेत हैं। सर्दियों के सीजन में यहां पर्यटन, ट्रैकिंग, नेचर वाॅक के साथ पक्षियों का भी पर्यटक अवलोकन आसानी से कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इतने साल बाद दुर्लभ गिद्द प्रजाति का दिखना पक्षी और प्रकृति प्रेमियों के लिए अहम है। गिद्दों की वल्चर बियर्डेड प्रजाति को 16 साल बाद यहां देखा गया है।
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