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100 साल बाद घणता में शाही स्न्नान करेंगे चालदा महाराज

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जौनसार बाबर के आराध्य कुल देवता चालदा महासू देवता का भद्र शुक्ल गणेश चतुर्थी को होने वाले जागड़े पर्व की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सिद्ध पीठ महासू महाराज का मूल स्थान हनोल में है। इसके पश्चात द्वितीय सिद्ध पीठ स्थान थैना मंदिर का है। ऐसी मान्यता है थैना मंदिर के श्री चालदा महासू महाराज को केवल जौनसार में भ्रमण करने का अधिकार है।
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बीते जून माह में कोटा तपलाड़ से घणता प्रवास पर आए है। जून माह से श्री चालदा महाराज खत बनगांव के घणता में विराजमान है, जोकि आगामी दो वर्षों तक यहीं विराजमान रहेंगे। यहां से देवता खत शैली के दोहा गांव जाएंगे। वहां से खत कोरु के कचटा गांव में प्रवास के बाद अपने मूल स्थान खत पंजगांव के थैना गांव में विराजमान होंगे। श्री चालदा महाराज खत बन गांव के अध्यक्ष अतर सिंह तोमर ने बताया कि यह पहला अवसर होगा जब खत के लोग इस धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बनेंगे।
उन्होंने बताया कि 30 अगस्त को महाराज का रात्रि जागरण होगा। 31 अगस्त को महाराज को पालकी में बैठा कर चमराणा धार नामक स्थान पर (देवपाणी) जल में शाही स्नान कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पर्व में लगभग दस हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। समिति ने इस ऐतिहासिक पर्व को सफल बनाने के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। समिति के उपाध्यक्ष भजन सिंह तोमर ने बताया कि मंगलवार 30 अगस्त को कोटुवा गांव स्थित महासू महाराज, जो कि खत बनगांव के कुल देवता हैं, का शाही स्नान होगा। पुजारी नारायण दत्त जोशी महाराज को भोग लगाएंगे। घणता निवासी भजन सिंह परिवार की ओर से भंडारे का वितरण किया जाएगा।
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महाराज की कारिंदे रखते हैं उपवास
देवता के पुजारी, वजीर, भंडारी, ठाणी और डडवारियों को देवता के कारिंदे कहा जाता है। देवता के जागड़े के एक दिन पूर्व से शाही स्नान होने तक उपवास रखते हैं। शाही स्नान के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं।
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