आदि शंकराचार्य ने कराया था जीर्णोद्धार
मां चंडी देवी मंदिर का आठवीं शताब्दी में जगदगुरु आदि शंकराचार्य ने विधिवत रूप से जीर्णोद्धार कराया था। इसके बाद कश्मीर के राजा सुचेत सिंह ने 1872 में मंदिर का पुन जीर्णोद्धार कराया। मां रुद्र चंडी एक खंभे के रूप में स्वयंभू अवतरित हैं।
मंदिर तक पहुंचने का मार्ग
मां चंडी देवी मंदिर हरिद्वार रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन से नजीबाबाद-हरिद्वार हाइवे पर करीब पांच किलोमीटर दूर है। यहां ऑटो, बैटरी रिक्शा, टैक्सी के अलावा निजी वाहनों से पहुंचा जा सकता है। सड़क से मंदिर तक करीब तीन पैदल कठिन चढ़ाई है। जबकि मां के दरबार तक रोप-वे भी संचालित होते हैं।