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चैत्र नवरात्रि 2020: इन तीन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना से मिलेगा सौभाग्य, ऐसे करें देवी की पूजा

Wed, 25 Mar 2020 03:06 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • पहले दिन मां शैलपुत्री की होगी पूजा, इस बार चित्र नक्षत्र न होने के कारण तीन लग्न होंगे
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- फोटो : डेमो फोटो
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विस्तार
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चैत्र नवरात्रि बुधवार (आज) से शुरू हो गए हैं। पहले दिन घट-स्थापन के साथ माता के शैलपुत्री रूप की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस बार चित्र नक्षत्र नहीं पड़ेगा, जिस कारण तीन लग्न में किसी भी समय आप घट-स्थापन कर सकते हैं।  

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विद्वत सभा के प्रवक्ता विजेंद्र प्रसाद ममगाईं के अनुसार, घट-स्थापन का पहला लग्न द्विस्वभाव सुबह 6.15 से 7.19 बजे तक रहेगा। दूसरा वृष लग्न (स्थिर लग्न) सुबह 8.45 से 10.40 बजे तक रहेगा। यदि कोई इन दोनों लग्नों में घट-स्थापन नहीं कर पाए तो वे तीसरे लग्न अभिजीत मुहूर्त 11.30 से दोपहर 12.46 बजे तक के बीच मे भी पूजा कर सकते हैं। अष्टमी एक अप्रैल व नवमी दो तारीख को पड़ रही है। 

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देवी के नौ अवतार की करें पूजा

-25 मार्च, शैलपुत्री का पूजन, वाणी पर नियंत्रण रखें
-26 मार्च, ब्रह्माचारिणी का पूजन, ब्रह्मचार्य का पालन करना
-27 मार्च, चंद्रघंटा का पूजन, सच्ची व स्वच्छ बातों का श्रवण करना
-28 मार्च, कुष्मांडा का पूजन, भोजन आदि पर नियंत्रण,
-29 मार्च, स्कंदमाता का पूजन, नेत्र पर नियंत्रण,
-30 मार्च, कात्यायनी का पूजन, विचारों में नियंत्रण करना सिखाता है।
-31 मार्च, कालरात्रि का पूजन, काल पर नियंत्रण करने
- 1 अप्रैल (अष्टमी), महागौरी का पूजन, व्रती के अहंकार की प्रवृति समाप्त करने
- 2 अप्रैल (नवमी), सिद्धीदात्री का पूजन,  माता हर कार्य सिद्ध करने का आशीर्वाद देती है।
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ऐसे करें घटस्थापन

सामान्य मिट्टी के बर्तन या ताम्र बर्तन में कलश की स्थापना कर सकते हैं। अखंड जोत करने वाले श्रद्धालु कलश स्थापना में दो नारियल, इसमें से एक कलश के ऊपर तथा दूसरा अखंड ज्योत के पास रखें।

पहले मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें हरियाली के प्रतीक जौं बोएं। इसके बाद कलश को विधिपूर्वक स्थापित करें। मां की प्रतिमा स्थापित और पूजन करने से पहले भगवान गणेश का पूजन करें। प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
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