वाडिया को दिए गए आठ करोड़
हिमनद झीलों के अध्ययन के साथ अर्ली वार्निंग सिस्टम भी लगाए जाने हैं। इसके लिए वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान को नोडल संस्था बनाने के साथ आठ करोड़ की राशि दी गई है। संस्थान के निदेशक विनीत गहलोत ने बताया कि वाडिया नोडल संस्था है पर इस काम में एनआईएच समेत अन्य संस्थानों की अलग- अलग भूमिका रहेगी। इस बार कम से कम एक झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का लक्ष्य है।
निगरानी केंद्र भी तैयार होगा
हिमनद झीलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने के साथ ही एक स्थायी हिमानी झील निगरानी केंद्र बनाने की भी योजना है। इस केंद्र के माध्यम से झीलों की लगातार निगरानी की जाएगी और किसी संभावित खतरे की सूचना संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा सकेगी। यूएसडीएमए ने वर्ष-2027 में डाउन स्ट्रीम क्षेत्रों में सायरन आधारित चेतावनी यंत्र लगाने और अलर्ट प्रसारण प्रणाली आदि की व्यवस्था को तैयार करने की भी लक्ष्य रखा है।