सचिव डॉ. रेनू स्वरूप ने कहा कि हैस्को के साथ मिलकर ‘रूरल बायो रिसोर्स इंटरप्रेन्योरशिप नेटवर्क’ खड़ा किया जाएगा। इसमें तीन हिस्से होंगे जिसमें महिलाएं, पुरुषों व बच्चों को जोड़ने के लिए सम्मिलित रूप से एक नेटवर्क के रूप में कार्य किया जाएगा। डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि हिमालय संसाधनों की दृष्टि से सबसे धनी है पर उससे लाभ लेने में सबसे पीछे है। रोजगार को संसाधन से जोड़कर पलायन रोका जा सकता है। ऐसे प्रयोग हैस्को कर चुका है और प्रयासरत है।
इससे पूर्व डॉ. रेनू स्वरूप और सलाहकार डॉ. मीनाक्षी मुंशी ने हैस्को की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न जैव प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों एवं किसान बायोटेक का भी अवलोकन किया। उन्होंने हैस्को की विभिन्न तकनीकी उन्नत घराट, बायो गैस, लो कॉस्ट वाटर फिल्टर, रूरल गीजर, पायरोलाइजर, वर्मी कंपोस्ट, बायो फर्टीलाइजर, सोलर ड्रायर, दक्ष चूल्हा, रूट प्रोसेसिंग, मशरूम कल्टीवेशन, कारीगर कार्यशाला और किसान बैंक का भी अवलोकन किया और जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड से आए किसानों व प्रसाद योजना से जुड़े लोगों से बातचीत की।
कार्यक्रम में चकराता क्षेत्र से, अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग उत्तरकाशी और आसपास के ग्रामीणों ने पारंपरिक परिधान में सचिव डॉ. रेनू स्वरूप और डॉ. मीनाक्षी मुंशी का स्वागत किया। इस अवसर पर यूसर्क के निदेशक डॉ. दुर्गेश पंत, डॉ. मंजू सुंदरियाल, डॉ. सैस बिस्वास, जम्मू के डॉ. आरके खजूरिया, ईश्वर जोशी व हैस्को के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. राकेश कुमार, डॉ. किरन नेगी, डॉ. हिमानी पुरोहित, डॉ. सुभाष नौटियाल, डॉ. दीप्ति पांडे, विनोद खाती आदि उपस्थित थे।