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केंद्र ने उत्तराखंड की योजनाओं पर चलाई कैंची

Fri, 12 Aug 2016 10:11 AM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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नरेंद्र मोदी
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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिलने वाले फंड की कई योजनाओं में कट लगा दिया है।
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मरीजों के निशुल्क स्वास्थ्य जांचों में बड़ा कट लगाते हुए रेडियोलॉजी की सुविधा देने के लिए राज्य की करोड़ों रुपये की लागत वाली टेली रेडियोलॉजी योजना को खारिज कर दिया गया है। क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के अनुपालन के लिए भी केंद्र से 55 करोड़ की वित्तीय मदद को झटका लगा है।

वहीं, मोबाइल वैन से सर्जिकल कैंप लगाने की योजना भी अस्वीकार कर दी गई है। साथ ही केंद्र ने ढांचागत और अधिकारियों के दौरों से संबंधित योजनाओं पर भी कैंची चलाई है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पर निर्भर करती हैं। मिशन के तहत केंद्र से हर वर्ष कई सौ करोड़ बजट मिलता है, लेकिन यह पूरे तरीके से खर्च तक नहीं हो पाता।
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केंद्र ने इस बार राज्य की ऐसी कई योजनाओं को अस्वीकार कर दिया है, जो उसके पैमाने पर फिट नहीं बैठती। इन योजनाओं को लेकर राज्य सरकार केंद्र से उम्मीद लगाए बैठी थी। प्रदेश में रेडियोलॉजिस्ट की कमी को देखते हुए विभाग ने टेली रेडियोलॉजी शुरू करने की घोषणा की थी।

इस योजना के तहत पहाड़ों में अल्ट्रासाउंड, एक्स रे, एमआरआई आदि जांचों की ऑनलाइन व्यवस्था की जानी थी, ताकि मरीजों को इन जांचों के लिए शहरों में नहीं आना पड़े। विभाग इस योजना को मिशन से फंड करवाना चाहता था, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिली।

केंद्र ने दवाओं और टीकाकरण वितरण एवं प्रबंधन सिस्टम (डीयूडीएमएस) के लिए जो प्रस्ताव भेजा था उसे भी अस्वीकृत कर दिया गया है। केंद्र का मानना है कि इससे केवल अधिकारियों के दौरे और ढांचागत निर्माण पर खर्चा होगा। क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के अनुपालन के लिए भी मांगे बजट में 70 प्रतिशत तक कटौती हुई है। 

कार्डियेक केयर यूनिट्स के लिए छह करोड़ के प्रस्ताव को केंद्र ने सही नहीं पाया। केंद्र ने उप जिला अस्पतालों में सर्जिकल कैंप लगाने के लिए धनराशि की मांग को पेंडिंग में डाल दिया है।
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मोबाइल फिल्ड यूनिट्स के लिए 3.30 करोड़ को भी अस्वीकृत कर दिया गया। हालांकि, मिशन के तहत संचालित होने वाली मोबाइल हेल्थ वैन संचालन में कोई कटौती नहीं की है। राज्य में नए ब्लड बैंक के लिए प्रदेश सरकार ने 20.7 करोड़ मांगे थे, जिसमें से महज 7.3 करोड़ ही स्वीकृत किए गए हैं।
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