राज्य में कई नए विकास खंडों के सृजन के लिए केंद्र ने किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता देने से साफ इनकार कर दिया है। दूसरी ओर इनके गठन को लेकर सचिव पंचायतीराज की अध्यक्षता में गठित कमेटी भी अभी अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं कर पायी है। ऐसे में यह मामला लटकता दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने बेशक कई इलाकों में नए विकास खंडों के सृजन को लेकर घोषणाएं कर दी हों, लेकिन उनके कार्यकाल में इनका सृजन हो जाएगा, इसकी उम्मीद अब बहुत ही कम है। राज्य में वर्तमान में 95 विकास खंड हैं और राज्य गठन के साथ ही विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए तमाम जिलों में नए विकास खंडों के सृजन की मांग उठती रही है।
बता दें कि सीएम हरीश रावत ने अपने दो साल के कार्यकाल में तल्लादेश, दुग नाकुरी समेत कई क्षेत्रों को नए विकास खंड बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने पंचायतीराज विभाग के अफसरों को निर्देश भी दिए कि घोषणाओं पर तेजी से अमल किया जाए। लेकिन इन घोषणाओं में केंद्र सरकार ने अड़ंगा लगा दिया है।
समिति कर रही मूल्यांकन
उधर, नए विकास खंडों के सृजन और पुर्नगठन को लेकर सचिव पंचायतीराज की अध्यक्षता में गठित कमेटी भी अभी तमाम पहलुओं पर विचार-विमर्श ही कर रही है। उत्तराखंड ब्लाक प्रमुख संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एमएस राणा ने बताया कि जिस अनुपात में नए जिलों का गठन किया गया, उस अनुपात में नए विकास खंड नहीं बनाए गए। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि राज्य सरकार केंद्र की अनुमति से नए विकास खंडों का सृजन करें, ताकि आमजन की मुसीबतेें कम हो।
क्या हैं नए विकास खंडों के सृजन की प्रक्रिया
harish rawat
उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम -2016 के मुताबिक राज्य को नए विकास खंडों के सृजन का अधिकार है। लेकिन इनके सृजन के बाद येाजनागत और प्रशासनिक मद में भारी भरकम बजट की जरूरत होती है। ऐसे में तमाम सरकारें केंद्र पर आश्रित होती हैं। केंद्र से वित्तीय मदद के आश्वासन के बाद ही सरकारें नए विकास खंडों का सृजन करती है। पंचायती विभाग के अफसरों के मुताबिक पिछले डेढ़ दशक में पूरे देश में अपवादस्वरूप एक दो विकास खंडों का गठन हुआ है। उत्तराखंड गठन से पूर्व यूपी की ओर से पर्वतीय इलाकों में नए विकास खंडों के गठन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था, लेकिन केंद्र ने बजट देने से इंकार कर दिया था। ऐसे में प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया था।
राज्य में नए विकास खंडों के गठन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। अभी तक केंद्र ने कोई जवाब नहीं दिया है। विकास खंडों के सृजन को लेकर केंद्र से दिशा निर्देश भी मांगा गया है। राज्य सरकार नए पंचायतीराज अधिनियम के तहत विकास खंडों का सृजन तो कर सकती है, लेकिन इनके गठन के बाद योजनागत और प्रशासनिक मद में भारी भरकम बजट की जरूरत पड़ेगी, जो केंद्र के सहयोग के बिना संभव नहीं है।
--सुशील कुमार, अपर सचिव/निदेशक, पंचायतीराज विभाग, उत्तराखंड