जनगणना की जानकारी रहेगी गोपनीय
निदेशक जनगणना ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना में आप जो भी जानकारी देंगे, वह गोपनीय होगी। उसे आरटीआई में साझा नहीं कर सकते। पुलिस, कोर्ट या अन्य किसी भी मंच पर इसे साझा नहीं किया जाता। यहां तक कि केंद्र सरकार के पास यह जानकारी सांख्यिकीय रूप में रहेगी। जैसे किसी मोहल्ले के कितने बच्चे स्कूल जाते हैं, वह तो पता होगा लेकिन किसी व्यक्ति विशेष का बच्चा किस स्कूल में जाता है, उसकी जानकारी उजागर नहीं होगी।
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जनगणना के आधार पर ही बनेगा विकास का खाका
आजाद भारत में पहली जनगणना वर्ष 1951 में हुई थी। इससे सरकार को पता चलता है कि लोगों की वास्तविक स्थिति क्या है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, एलपीजी की योजना, बिजली गांव-गांव में पहुंचाने जैसी तमाम योजनाएं शुरू की गईं। अब जनगणना के ताजा आंकड़ों से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। सरकार को आगे हर क्षेत्र के विकास का रोडमैप बनाने में मदद मिलेगी।