हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के सभी पुलिस स्टेशनों, पुलिस चेक पोस्ट, चौकी आदि में बायोमैट्रिक मशीन तथा सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं।
इन कैमरों को प्रत्येक 24 घंटे में मॉनीटर करने और इस प्रक्रिया के लिए एसएसपी की जिम्मेदारी तय की गई है। कोर्ट ने कैमरों की रिकॉर्डिंग को एक वर्ष तक सुरक्षित रखे जाने को कहा है। अदालत ने गृह सचिव को भी आदेश दिया है कि वह इस आदेश का अनुपालन 16 सप्ताह के भीतर कराएं अन्यथा वे इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
कोर्ट ने कहा कि महिला परिवादी की रिपोर्ट के समय महिला ऑफिसर की उपस्थिति अनिवार्य होगी। कोर्ट ने सभी बायोमैट्रिक सिस्टम को आधार कार्ड से जोड़ने को भी कहा है। मंगलवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने हल्द्वानी निवासी गिरीश चंद्र जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे एवं बायोमैट्रिक मशीनें लगाई जाएं जिससे वादी की वास्तविक पहचान हो सके। इससे महिलाएं को फायदा होगा जो थाने में जाने से डरती हैं और कई बार उनकी रिपोर्ट दर्ज करने में देरी की जाती है।
याची के मुताबिक सीसीटीवी लगने से यह स्पष्ट हो जाएगा कि शिकायतकर्ता किस समय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने आया था। वादी का अंगूठा बायोमैट्रिक में लगाया जाएगा तो उससे पता रहेगा कि किस समय वह व्यक्ति आया था और रिपोर्ट कब दर्ज की गई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़ित लोगों की प्राथमिकी दर्ज करने में पुलिस आमतौर पर टालमटोल करती है तथा अक्सर वादियों के साथ दुर्व्यवहार भी होता है। कुछ अवसरों पर हिरासत में मौत की शिकायत भी मिलती है।
बायोमैट्रिक तथा सीसीटीवी कैमरे लगने से इन सब में रोक लगने के साथ ही थाने की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार को नोटिस जारी किए थे तथा उससे पक्ष मांगा था, पर सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया।