क्या कहते हैं शिक्षाविद्
पूर्व शिक्षा निदेशक पुष्पा मानस ने कहा कि इन स्कूलों में स्टाफ की कमी है, जो स्टाफ हैं उन्हें सीबीएसई पैटर्न से पढ़ाने का प्रशिक्षण नहीं दिया गया। केंद्रीय विद्यालयों में गर्मियों की छुट्टियाें में विषयवार शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है और कार्ययोजना तैयार की जाती है। यहां ऐसा नहीं हुआ।
केवल बोर्ड लगाकर स्कूलों का नाम बदल दिया गया। अच्छे रिजल्ट के लिए बच्चों के साथ ही पढ़ाने वालों का भी सतत मूल्यांकन करना होगा। पूर्व अपर शिक्षा निदेशक संतोष कुमार शील के मुताबिक जो शिक्षक 20 से 25 साल से हिंदी माध्यम से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वे अब अंग्रेजी माध्यम से कैसे पढ़ाएंगे।
सरकार पर हर साल 15 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक उत्तराखंड बोर्ड के 186 स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न लागू करने से सरकार पर हर साल 15 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। वहीं उत्तराखंड देश का ऐसा राज्य बन गया है, जहां सरकारी स्कूलों में दो तरह के बोर्ड चल रहे हैं।
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50 प्रतिशत से कम रिजल्ट वाले शिक्षकों से जवाब तलब, छुट्टी में खुलेंगे स्कूल
शिक्षा विभाग की ओर से 50 प्रतिशत से कम रिजल्ट वाले अटल उत्कृष्ट स्कूलों के शिक्षकों से जवाब मांगा गया है। वहीं जिन छात्र-छात्राओं की कंपार्टमेंट आई है, उनकी परीक्षा तैयारी के लिए गर्मियों की छुट्टी में स्कूल खुले रखने का आदेश जारी किया गया है। शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार की अहम योजना अटल उत्कृष्ट स्कूलों में परीक्षाफल संतोषजनक न होना चिंता का विषय है। सभी सीईओ परीक्षा तैयारी की हर सप्ताह समीक्षा करें।