ठेकेदारों से हो सकती है पूछताछ
इस मामले में देहरादून निवासी अनु पंत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि कॉर्बेट में छह हजार पेड़ों के अवैध कटान के संबंध में कई रिपोर्टें कोर्ट के सामने रखी गईं। ये सभी रिपोर्ट याचिकाकर्ता के वकील अभिजय नेगी ने कोर्ट को विस्तार से दिखाईं। इस मामले में सीबीआई सबसे पहले पाखरो सफारी निर्माण से जुड़े सेवानिवृत्त और मौजूदा वन अफसरों समेत रेंज में काम करने वाले करीब एक दर्जन वन अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों से पूछताछ कर सकती है।
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सीबीआई की जांच का मुख्य केंद्र बिंदु तत्कालीन वन मंत्री हरक सिंह रावत भी होंगे। क्योंकि विजिलेंस और अन्य जांचों में यह बात सामने आई है कि हरक सिंह के दबाव में ही कॉर्बेट टाइगर सफारी में वित्तीय और अन्य स्वीकृतियां लिए बिना ही काम शुरू कर दिया गया था। इधर, निदेशक विजिलेंस डॉ. वी मुरुगेशन ने बताया कि सीबीआई को एफआईआर की कॉपी पहले ही सौंपी जा चुकी है। अब जो भी संबंधित साक्ष्य हैं, उन्हें सौंपा जा रहा है। सीबीआई की ओर से अब तक की जांच से संबंधित जो भी कागजात इत्यादि मांगे जाएंगे, उन्हें सौंप दिया जाएगा।