गंगा में अवैध खनन के खिलाफ 115 दिन अनशन पर बैठे मातृ सदन के संत निगमानंद की मौत के मामले में स्पेशल जज सीबीआई की अदालत ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका को स्वीकार कर लिया है।
अदालत ने प्रकरण में अपने फैसले में दिए गए बिंदुओं पर फिर से सुनवाई करते हुए नए सिरे से आदेश पारित करने के आदेश दिए हैं। सीबीआई ने इस मामले में 28 दिसंबर 2011 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
हरिद्वार मातृ सदन के संत निगमानंद ने कुंभ क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ अनशन शुरू किया था। इस बीच उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 13 जून 2011 को हिमालय इंस्टीट्यूट जौलीग्रांट में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मातृ सदन का आरोप था कि उनकी स्वाभाविक मौत नहीं है, उन्हें जहर देकर मारा गया है।
मेडिकल रिपोर्ट में पाया गया था टॉक्सिन
प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीसीआईडी जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन निगमानंद की मेडिकल रिपोर्ट में टॉक्सिन पाए जाने की बात सामने आने पर सरकार ने प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग को स्वीकारते हुए केंद्र सरकार को इसकी सिफारिश की।
सीबीआई ने प्रकरण की जांच कर दिसंबर 2011 में इस मामले में एफआर लगा दी थी। 19 जून 2012 को निचली अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया था।
मामले में सत्र न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने वाले मातृ सदन के संत दयानंद ने कहा कि सीबीआई ने प्रकरण की ठीक से जांच करे बगैर एफआर लगा दी थी। हमने अदालत में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के साथ ही कई साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।
अदालत ने दिए इन बिंदुओं पर सुनवाई के आदेश
सीबीआई अदालत ने 50 से अधिक बिंदुओं पर सुनवाई के आदेश दिए हैं। इसमें कहा है कि डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल किंग जार्ज कॉलेज लखनऊ द्वारा प्रेषित रिपोर्ट एवं बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की ओर से भेजी गई रिपोर्ट, एएफएमसी कॉलेज की ओर से भेजी गई रिपोर्ट सहित विभिन्न बिंदुओं पर सुनवाई के आदेश दिए हैं। इन बिंदुओं में मौत की वजह के कारण बताए गए हैं कि किन कारणों से मौत हो सकती है किनसे नहीं ।
सवालों के घेरे में एफआर रिपोर्ट
सीबीआई अदालत ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए सीबीआई को झटका दिया है। निचली अदालत सीबीआई को फिर से जांच के आदेश कर सकती है, इस फैसले से सीबीआई की एफआर रिपोर्ट सवालों के घेरे में हैं।
-चंद्रशेखर तिवारी, विशेष कमेटी सदस्य उत्तराखंड बार काउंसिल
कांग्रेसियों ने भी जताई थी नाराजगी
संत निगमानंद की मौत के मामले में उस दौरान कांग्रेस ने भी जमकर हंगामा किया था। कांग्रेसियों का आरोप था कि फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी को गंगा से जुड़े अभियान की ब्रांड अंबेसडर बनाया गया है। जबकि इसी मुद्दे पर अनशन कर रहे संन्यासी से बात तक नहीं की गई।