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पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी मुहिम के सामने पहाड़ सी मुश्किल

Tue, 06 Dec 2016 02:44 PM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
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कैशलेस - फोटो : social media
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नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही कैशलेस की मुहिम का उत्तराखंड में परवान चढ़ना बेहद मुश्किल है। यहां कैशलेस की व्यवस्था लागू करने में पहाड़ जैसी चुनौतियां हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में कैशलेस उत्तराखंड की चुनौतियों पर चर्चा की गई और इसके हल निकालने के प्रयास भी किए गए।
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केंद्र सरकार ने हाल ही में कैशलेस व्यवस्था लागू करने को प्राथमिकता देते हुए सभी राज्यों को निर्देश जारी किए हैं, लेकिन उत्तराखंड में यह व्यवस्था बेहद मुश्किल है।

हालात यह हैं कि प्रदेश में करीब 22 हजार प्वाइंट ऑफ सेल्स मशीन (पीओएस) की जरूरत है, जबकि अभी तक केवल 4160 ही उपलब्ध हैं। प्रदेश में कुल 2149 सब सर्विस एरिया (एसएसए) हैं। इनमें से 1181 एसएसए में कनेक्टिविटी नहीं है। राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 940 एसएसए में तो कनेक्टिविटी हो ही नहीं सकती।
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राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र भेजा तो कहा गया कि नाबार्ड के सहयोग से एसएसए चलाने को वीसेट का इंतजाम किया जाएगा, लेकिन अभी तक केवल 18 वीसेट पूरे उत्तराखंड में उपलब्ध हैं। जबकि इनकी संख्या 500 से ऊपर होनी चाहिए। इसके चलते ग्रामीण उत्तराखंड नोटबंदी से सबसे ज्यादा जूझ रहा है।
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इन कैशलेस विकल्पों पर चल रहा है विचार

डिजिटल मोड से पेमेंट
अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डिवाइस (यूएसएसडी) : इस सुविधा का लाभ लेने के लिए एंड्रायड मोबाइल की जरूरत नहीं है। सामान्य मोबाइल में अगर आपका मोबाइल नंबर आपके खाते से लिंक है तो उसमें *99# डायल करके ट्रांजक्शन की जा सकती है।

आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) : पीओएस उपलब्ध न होने पर यह पेमेंट का बेहतर विकल्प बन सकता है। इसके लिए एंड्रायड मोबाइल जरूरी है। इससे फिंगर प्रिंट रीडर को कनेक्ट करना होगा। ग्राहक अपना आधार नंबर बताकर फिंगर प्रिंट मैच कराएगा। इसके बाद उसके खाते से सीधा दुकानदार के खाते में पैसा ट्रांसफर हो जाएगा।

बैंक कार्ड : बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वह ज्यादा से ज्यादा संख्या में अपने खाताधारकों को डेबिट कार्ड या कोई भी दूसरा जरूरी कार्ड उपलब्ध कराएं। ताकि वह आसानी से कार्ड से कैशलेस शॉपिंग कर सकें।
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