नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही कैशलेस की मुहिम का उत्तराखंड में परवान चढ़ना बेहद मुश्किल है। यहां कैशलेस की व्यवस्था लागू करने में पहाड़ जैसी चुनौतियां हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में कैशलेस उत्तराखंड की चुनौतियों पर चर्चा की गई और इसके हल निकालने के प्रयास भी किए गए।
केंद्र सरकार ने हाल ही में कैशलेस व्यवस्था लागू करने को प्राथमिकता देते हुए सभी राज्यों को निर्देश जारी किए हैं, लेकिन उत्तराखंड में यह व्यवस्था बेहद मुश्किल है।
हालात यह हैं कि प्रदेश में करीब 22 हजार प्वाइंट ऑफ सेल्स मशीन (पीओएस) की जरूरत है, जबकि अभी तक केवल 4160 ही उपलब्ध हैं। प्रदेश में कुल 2149 सब सर्विस एरिया (एसएसए) हैं। इनमें से 1181 एसएसए में कनेक्टिविटी नहीं है। राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 940 एसएसए में तो कनेक्टिविटी हो ही नहीं सकती।
राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र भेजा तो कहा गया कि नाबार्ड के सहयोग से एसएसए चलाने को वीसेट का इंतजाम किया जाएगा, लेकिन अभी तक केवल 18 वीसेट पूरे उत्तराखंड में उपलब्ध हैं। जबकि इनकी संख्या 500 से ऊपर होनी चाहिए। इसके चलते ग्रामीण उत्तराखंड नोटबंदी से सबसे ज्यादा जूझ रहा है।