बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच में एसआईटी के नतीजे दांतो तले अंगुलियां दबाने वाले है। अमान्य डिग्री की जो फेहरिश्त सामने आ रही है, उससे शिक्षा विभाग की पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
अमान्य डिग्री के बल पर गुरु जी का तमगा लगाकर हर माह सरकारी धन डकारने वालों को बाहर का रास्ता दिखाने की कोशिश क्यों नहीं की गई। अब तक दो शिक्षा मित्रों समेत 15 शिक्षकों की डिग्री की पोल पट्टी सामने आ चुकी है। इनमें दो शिक्षा मित्र ऐसे है, जिन्हें हाईस्कूल करने के बाद इंटर करने में 15 से 20 साल का समय लगा है। एक शिक्षक तो एक साल में हाईस्कूल में फेल होने के बाद उसी साल पास होने की अंक तालिका ले आए।
शासन के आदेश पर इस साल13 जुलाई को सीबीसीआईडी की अपर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे की अगुवाई में गठित एसआईटी के पास बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 144 शिक्षकों के खिलाफ अमान्य प्रमाण पत्र होने की शिकायत आई थी। इन प्रमाण पत्रों के सत्यापन की जांच को पत्रावली देश के कई राज्यों में भेजी गई है। सत्यापन की जो रिपोर्ट सामने आ रही है, वो अंधी व्यवस्था बताने के लिए काफी है। अमान्य डिग्री के आधार पर गुरु जी बने इन जालसाजों पर कितना शिकंजा कस पाएगा, यह देखना दिलचस्प रहेगा।
केस नंबर-एक
एसआईटी की जांच के बाद पहला मुकदमा सावित्री शिक्षा सदन जूनियर हाईस्कूल हर्रावाला चार शिक्षकों के खिलाफ दर्ज हुआ है। यहां के शिक्षक अजय कुमार सिंह, नीलम पांडेय, सुनीता सिंह की गैर मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से प्राप्त बीएड/बीटीसी/शिक्षा विशारद की डिग्री तथा शिक्षक कौशलेंद्र सिंह बीटीसी/बीएड न होते हुए मात्र बीपीएड की डिग्री के आधार पर नियुक्ति दी गई थी।
केस नंबर-दो
एसआईटी की जांच में मंगलौर के शिक्षक नरेश चोपड़ा की हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से ली गई विशारद की डिग्री अमान्य पाई गई है। शिक्षा निदेशालय ने भी 2010 में चोपड़ा की सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ चोपड़ा हाईकोर्ट चले गए थे, तब से यह मामला विचाराधीन है। एसआईटी हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रही है।
केस नंबर-तीन
कालसी स्कूल में तैनात शिक्षा मित्र गुलाब सिंह ने 1986 में हाईस्कूल किया था। इसके बाद उन्हें इंटर पास करने में बीस साल का समय लग गया। 2006 में गुलाब सिंह द्वारा हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से बारहवीं की। 2004 में शिक्षा आचार्य बनने के बाद 2011 में गुलाब सिंह ने गढ़वाल यूनिवर्सिी से बीए किया। इस डिग्री से उन्हें शिक्षा मित्र के रुप में तैनाती मिल गई। 2014 में सिंह नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी से बारहवीं की परीक्षा पास कर ली।
केस नंबर-चार
भगवानपुर के शिक्षक जहेन्द्र ने नियुक्ति के समय 1993 में बीएमएस इंटर कालेज मऊखास मेरठ से उर्तीण होने की अंक तालिका प्रस्तुत की थी। एसआईटी जांच में आया कि जहेन्द कुमार की कक्षा छह से कक्षा दस तक की शिक्षा एएचपी इंटर कालेज छुटमुलपुर सहारनपुर में हुई। जहेन्द्र ने 1993 में इसी कालेज से संस्थागत छात्र के रुप में हाईस्कूल की परीक्षा दी थी, जिसमें वह फेल हो गया था। ऐसे में इसी साल पास होने की अंक तालिका फर्जी है। एसआईटी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति कर चुकी है।
केस नंबर-पांच
कालसी के शिक्षा मित्र मोहन सिंह की डिग्री भी अमान्य पाई गई है। उन्होंने हाईस्कूल करने के 16 साल बाद हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से मध्यमा की डिग्री प्राप्त की। इसी आधार पर गढ़वाल यूनिवर्सिटी से बीए कर वह शिक्षा मित्र बन गए। एसआईटी उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर चुकी है।
किस जिले से कितनी शिकायत
देहरादून-16
हरिद्वार-50
उत्तरकाशी- 03
टिहरी- 06
पौडी-16
चमोली-07
उधम सिंह नगर-22
नैनीताल- 05
अल्मोड़ा-11
चंपावत-08
निदेशालय में फंसी जपेन्द्र पर कार्रवाई की संस्तुति
एसआईटी ने जांच के बाद भगवानपुर के शिक्षक जहेन्द्र कुमार के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति 28 सितंबर को शिक्षा निदेशालय भेजी थी। यह संस्तुति रिपोर्ट निदेशालय में फाइलों में दब गई है। मुकदमा दर्ज कराने के लिए यह पत्रावली सोमवार तक हरिद्वार के शिक्षाधिकारी को नहीं मिल पाई थी। यह स्थिति तब है, जब शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने विभागीय अधिकारियों को कोताही बरतने पर कार्रवाई की चेतावनी दे चुके है।
शिक्षा मंत्री ने जाना एसआईटी जांच का हाल
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने सोमवार को एसआईटी प्रभारी और सीबीसीआईडी की अपर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे के साथ अब तक आए जांच के नतीजों पर चर्चा की। मंत्री ने समीक्षा के बाद जांच रिपोर्ट पर संतोष जताया है। उन्होंने गुण-दोष के आधार पर दोष निर्धारण करने को कहा, ताकि संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जा सके।