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बाबा रामदेव का साथ देने वाले भी होंगे 'अंदर'

Sat, 23 Nov 2013 04:32 PM IST
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, हरिद्वार
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जमीन पर कब्जे को लेकर ग्रामीण चिल्लाते रहे। अधिकारियों के दर तक फरियाद पहुंची लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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अधिकारी सलाम ठोकने में लगे रहे
स्टांप ड्यूटी कम लगाई गई तो सवाल यह भी है कि अधिकारी आंख बंद क्यों देखते रहे। उस दौरान रामदेव उगता सूरज थे और अधिकारी उगते सूरज को सलाम ठोकने में लगे रहे। लेकिन अब उगते सूरज को सलाम करने वाले अफसर भी नपेंगे। इसको लेकर जांच शुरू हो गई है।

सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से रामदेव पर दर्ज सभी 81 वाद वर्षों पुराने हैं। रामदेव को सरकार ने पहली बार वर्ष 2004 में जमीन खरीद की अनुमति दी थी। 2010 तक उन्होंने 301.501 हेक्टेयर जमीन खरीदी। औरंगाबाद में योगग्राम बनाया गया तो यहां के किसानों ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है।
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इसी तरह के आरोप शांतरशाह गांव में भी लगे। ग्राम सभा की जमीनों पर कब्जे के आरोपों के बाद सरकार ने योग गुरु पर जमीनों की रजिस्ट्री में कम स्टांप ड्यूटी अदा करने की तोहमत लगाई है। दिव्य योग मंदिर कृपालु बाग कनखल से निकलकर रामदेव ने बहादराबाद के निकट पतंजलि योगपीठ बनाई। औरंगाबाद में योगग्राम बनाया।

दबाव में कम स्टांप ड्यूटी पर रजिस्ट्री
पदार्था में मेगा फूड पार्क स्थापित किया। इसमें रामदेव का कोई भी प्रोजेक्ट छिपा हुआ नहीं था। पहले से ही बहुप्रचारित योजनाएं थी। इसके बावजूद निचले स्तर के अधिकारियों ने जमीनों की रजिस्ट्रियों में कृषि भूमि की तरह स्टांप ड्यूटी क्यों स्वीकार की। आखिर क्यों और किसके दबाव में कम स्टांप ड्यूटी पर रजिस्ट्री की गई।

यह ऐसे सवाल हैं जो रामदेव पर 81 मुकदमे ठोकने वाली सरकार और प्रशासन की पूरी कार्रवाई को रणनीतिक साबित करते हैं। बहरहाल अब सरकार ने रामदेव के खिलाफ मुकदमों की झड़ी लगाई है तो उन अधिकारियों की नींद भी उड़ गई, जो एक समय रामदेव के आगे शीर्षासन करते रहे हैं। अब प्रशासन तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की बात कह रहा है।
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जमीनों पर कब्जे और कम स्टांप ड्यूटी आदि मामलों में तत्कालीन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, इसका परीक्षण कराया जा रहा है। अगर किसी अधिकारी ने जानबूझकर मामलों को छिपाया है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति की जाएगी।
- डॉ. निधि पांडे, जिलाधिकारी, हरिद्वार
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