उत्तराखंड में डेंगू, स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियां फैल रही हैं लेकिन नर्सों की एक शिफ्ट की हड़ताल से लोग बेहाल हैं। नर्सें अब सुबह 8 से दो बजे तक की शिफ्ट में ही काम कर रही हैं। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
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प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दूसरी शिफ्ट में काफी परेशानी हुई। हालांकि मरीजों की जान पर बन आने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग अभी दो हफ्ते और अतिरिक्त व्यवस्था करने के मूड में नहीं है। अभी दून में इंटर्न, प्रशिक्षु फार्मासिस्ट और संविदा नर्सों की शुरुआत में की गई व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। गंभीर मरीजों की ढंग से केयर नहीं हो पा रही है।
महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीएस जोशी का कहना है कि नर्सों ने दो हफ्ते का समय दिया है। इस अवधि में कुछ हल निकल आएगा। उत्तराखंड नर्सेज एंड सर्विसेज एसोसिएशन की अध्यक्ष अंजना भौमिक ने कहा कि विभिन्न मांगों से संबंधित शासनादेश मिले बिना हड़ताल वापस नहीं होगी। नर्सें शनिवार तक दून जिले में ही हड़ताल कर रही थीं।
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बीमारी और हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग लाचार स्थिति में है। स्थिति संभालने के लिए विभाग ने कोई कार्ययोजना नहीं बनाई है। अधिकारियों का कहना है कि हड़ताल दो हफ्ते से ज्यादा चली तो फिर कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी। हालांकि, तब तक स्थिति बहुत बिगड़ चुकी होगी।
हरिद्वार में डेंगू संक्रमण महामारी की शक्ल अख्तियार कर रहा है। इसी तरह दून, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी आदि जिलों से स्क्रब टाइफस के लक्षणों वाले रोगी आ रहे हैं। मौसम के बदलते मिजाज के कारण वायरल संक्रमण ने पूरे प्रदेश को गिरफ्त में ले लिया है।
हड़ताल के चलते ऐसे हैं हाल
विकासनगर व साहिया में नर्सों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाने लगी हैं। हाल यह है कि इमरजेंसी तक में मरीजों की देखभाल के लिए नर्सें नहीं है। रविवार को हाजा गांव की जुन्नो देवी को प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी साहिया में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में उचित देखभाल न होने के कारण उसे आननफानन में 30 किलोमीटर दूर विकासनगर रेफर करना पड़ा। साहिया में तीन नर्सें है, जो सुबह की पाली में ही काम कर रही हैं। दोपहर और रात के समय मरीज रामभरोसे हैं।
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