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शिशु निकेतन बच्चों के साथ हुई दुर्घटनाओं की जांच पूरी, रिपोर्ट मुख्यालय भेजी

Thu, 07 Jun 2018 09:47 AM IST
रुद्रेश आर्य , अमर  उजाला, देहरादून
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डेमो - फोटो : डेमो
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एसआईटी ने देहरादून शिशु निकेतन में बच्चों के साथ हुई दुर्घटनाओं की जांच पूरी कर रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है। चार साल पहले एक बच्ची के जलने के मामले में एसआईटी ने तत्कालीन अधीक्षिका व कार्यकारी अधीक्षिका के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति की है। साथ ही प्रकरण में दर्ज दोनों मुकदमों में एसआईटी ने न्यायालय में आरोप-पत्र भी दाखिल कर दिए हैं।

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इसके अलावा दो माह की बच्ची की मौत के मामले में भी एसआईटी की रिपोर्ट में केयर टेकर के विरुद्ध विभागीय जांच को कहा गया है। शिशु निकेतन में हुई दुर्घटनाओं के मामले में महिला एवं बाल आयोग ने जांच की थी। प्राथमिक जांच में सामने आया था कि सभी घटनाएं वहां मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के चलते हुई हैं। इसके बाद अक्तूबर 2017 में अपर सचिव समाज कल्याण विभाग मनोज चंद्रन ने पुलिस मुख्यालय को चिट्ठी लिखकर इसकी एसआईटी जांच की मांग की थी। इस पर अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के निर्देश पर डीएसपी जया बलूनी के नेतृत्व में एक जांच दल का गठन किया था। एसआईटी की जांच के दौरान शिशु निकेतन में हुई दो घटनाओं (एक बच्ची का जलना व एक की मौत) में तीन नवंबर 2017 को मुकदमे दर्ज किए गए थे। 

पहले मामले के अनुसार 2014 में एक तीन वर्षीय बच्चे की केयर टेकर शांति की लापरवाही के कारण कमर जल गई थी। इस मामले में केयर टेकर शांति और फार्मासिस्ट हरिकिशन के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। जबकि, दूसरे मामले में दो माह के अक्षत की मौत में केयर टेकर सुशीला की लापरवाही सामने आने पर उसके खिलाफ भी जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। दोनों मामलों में एसआईटी ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिए हैं। 
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बच्ची के इलाज में हुई लापरवाही 
एसआईटी प्रभारी जया बलूनी ने बताया कि साल 2014 में तीन साल की मौली के साथ हुई घटना में तत्कालीन अधीक्षिका अंजना गुप्ता और कार्यकारी अधीक्षिका शशिकांता की लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने बताया कि जिस समय मौली की कमर जली उस समय अंजना गुप्ता छुट्टी पर थीं और शशिकांता के पास चार्ज था। मौली के जलने पर शशिकांता ने न तो इस बात का ध्यान दिया कि बच्ची कैसे जली और न ही उसके इलाज पर ही कोई गौर किया। दून अस्पताल से रेफर करने के बावजूद बच्ची को हायर सेंटर नहीं ले जाया गया था। इसके बाद जब अंजना गुप्ता ड्यूटी पर लौटीं तो उन्होंने भी इस मामले में ध्यान नहीं दिया। घटना के साढ़े तीन साल बाद जब बच्ची ज्यादा परेशान हुई तब उसका ऑपरेशन कराया गया। जबकि, चिकित्सकों ने घटना के समय ही ऑपरेशन की सलाह दी थी।

केयर टेकर के खिलाफ जांच की सिफारिश 
साल 2016 में एक बच्ची शांभवी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जांच के दौरान इसमें केयर टेकर रेवती की लापरवाही सामने आई है। लिहाजा एसआईटी ने रेवती के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति की है।

क्या हुआ था
शिशु निकेतन में दो माह के अक्षत को 12 घंटे से भूखा रखा गया था। अक्षत की मौत के मामले में एसआईटी की ओर से दायर आरोप पत्र में यह खुलासा हुआ है। इस खुलासे के मुताबिक जब अक्षत बिस्तर पर मृत मिला तो केयर टेकर ने झूठ बोल दिया कि उसने एक घंटे पहले ही उसे दूध पिलाकर सुलाया था। एसआईटी ने जब अक्षत के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी तब इस बात का खुलासा हुआ कि उसकी मौत अधिक देर तक भूखा रहने के कारण हुई थी। पोस्टमार्टम में बच्चे का आमाशय खाली होना पाया गया था। मामले में केयर टेकर सुशीला के विरुद्ध मुकदमा दर्ज है। 

अक्षत की मौत साल 2016 में हुई थी। घटनाक्रम के अनुसार दो माह का अक्षत सुबह सात बजे बिस्तर पर मृत पड़ा मिला था। उस वक्त वहां तैनात केयर टेकर सुशीला ने बताया था कि उसने सुबह पांच बजे अक्षत को दूध पिलाकर सुला दिया था। मामले को इसी तरह रफा-दफा करने का प्रयास किया गया। एसआईटी प्रभारी डीएसपी जया बलूनी ने बताया कि इस मामले की विस्तार से जांच की गई तो बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई। एसआईटी ने सबसे पहले अक्षत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच की। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने पाया था कि अक्षत की मौत सुबह सात बजे नहीं बल्कि रात में एक से दो बजे के बीच हुई थी। अंतिम बार उसे दिन में लगभग एक से दो बजे के बीच दूध पिलाया गया था। इस तरह लगभग 12 घंटे भूखा रहने के चलते अक्षत की मौत हुई। इन्हीं सब रिपोर्ट को आधार बनाते हुए सुशीला के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया है। 

नहीं भेजा गया हायर सेंटर 
2014 में तीन साल की मौली की कमर जलने के मुकदमे में भी आरोपपत्र दाखिल किया गया है। इस मामले में केयर टेकर शांति और फार्मासिस्ट हरिकिशन के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। डीएसपी बलूनी ने बताया कि घटना वाले दिन मौली के शरीर पर गंदगी लगी थी, जिसे धोने के लिए मौली ने शांति से कहा। इसके बाद शांति ने खुद इसे साफ न करते हुए एक बच्चे को कह दिया। बच्चे ने अज्ञानतावश उसे गर्म पानी के नल के नीचे बैठा दिया। बच्ची को दून अस्पताल में ले जाया गया, जहां से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। लेकिन, फार्मासिस्ट हरिकिशन उसे शिशु निकेतन ले आया। हरिकिशन और शांति के खिलाफ इन्हीं आरोपों की पुष्टि करते हुए न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

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