छावनी परिषद चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद अब बोर्ड उपाध्यक्ष पद के लिए बहुमत जुटाने की ‘जंग’ शुरू हो गई है।
जीत
से उत्साहित कांग्रेस दोनों बोर्डों में उपाध्यक्ष पद कब्जाने का दम भर
रही है तो हार का चांटा खाई भाजपा निर्दलीयों को तोड़ने में जुट गई है।
हालांकि प्रदेश की दो बड़ी छावनियों गढ़ी और क्लेमेंटटाउन में कांग्रेस के
लिए अच्छा मौका है।
गढ़ी में कांग्रेस जहां दोबारा अपना उपाध्यक्ष
बना सकती है तो क्लेमेंटटाउन में भी उसके लिए अच्छा मौका है। मंगलवार को
दोनों दलों के नेता बहुमत के लिए जरूरी अंकों का गुणा-भाग करते रहे। उधर,
जीते प्रत्याशियों के घरों पर बधाइयों का सिलसिला चलता रहा। अधिकतर
प्रत्याशियों ने क्षेत्र में जनता के लिए धन्यवाद पदयात्रा भी निकाली।
गढ़ी में कांग्रेस ने झोंकी ताकत
गढ़ी
कैंट में उपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए कांग्रेस ने साठगांठ शुरू कर दी है।
मंगलवार को पार्टी नेताओं ने निर्दलीयों से मुलाकात कर मन टटोला। कांग्रेस
के पास चार निर्दलीयों जितेंद्र तनेजा, राजेंद्र कौर सौंधी, मधु खत्री और
मीनू को जोड़ना आसान है।
हालांकि भाजपा के पास सिर्फ दो सभासद कमल राज
और मेघा भट्ट हैं, लेकिन वह भी निर्दलीयों से उम्मीद लगाए है। भाजपा के लिए
विनोद पंवार को साथ लेना मुश्किल नहीं है। बहुमत के खेल में हितेष गुप्ता
अहम रहेंगे। उनके भाई ओम प्रकाश गुप्ता भाजपा के मजबूत नेता हैं और चार बार
भाजपा से कैंट चुनाव जीत चुके हैं।
यहां विधायक हरबंस कपूर की
भूमिका भी अहम रहेगी। अगर कपूर ओम प्रकाश को साथ लेने में कामयाब रहे तो
भाजपा उलटफेर कर सकती है। उधर, कांग्रेस को बहुमत के लिए सिर्फ एक सभासद की
जरूरत है, जिससे उम्मीदें अब हितेष और विनोद पंवार पर टिक गई हैं।
कांग्रेस के कुछ नेताओं ने दोनों से संपर्क भी किया है।
क्लेमेंटटाउन में सैन्य मत बने विलेन
क्लेमेंटटाउन
में भाजपा को सैन्य मत नहीं मिलने से दोबारा बोर्ड में बहुमत जुटाना उसके
लिए लगभग असंभव हो गया है। भाजपा के रणनीतिकार मानते हैं कि सैन्य मत उनके
पक्ष में रहते हैं। दो वार्डों 4 और 5 में सैन्य मत न मिलने से भाजपा को
हार मिली।
निवर्तमान सभासद सुशीला रावत महज 43 मतों से हारी, उनकी
हार की बड़ी वजह सैन्य मतों का नहीं मिलना रहा। वार्ड पांच में भी भाजपा के
निवर्तमान सभासद नरेंद्र सिंह रावत सैन्य मत न मिलने से हारे हैं। भाजपा
मान रही है कि जिस तरह निवर्तमान बोर्ड ने कई मुद्दों पर सेना की खिलाफत
की, उससे सैन्य मत नहीं मिले।
उधर, मंत्री दिनेश अग्रवाल के लिए
क्लेमेंटटाउन में भाजपा की हार बड़ी राहत साबित हुई है। दिनेश किसी भी कीमत
पर दोबारा अपनी विधानसभा में भूपेंद्र कंडारी की अगुवाई में भाजपा का
बोर्ड नहीं चाहते हैं।
छावनी में निवर्तमान उपाध्यक्ष और वार्ड तीन
से जीते भूपेंद्र कंडारी ने माना कि उन्हें सैन्य मत नहीं मिलना, कुछ
वार्डों में भारी पड़ा। हालांकि वे मानते हैं कि केंद्र में भाजपा की सरकार
है, ऐसे में भाजपा का बोर्ड बनने पर बजट आदि की पैरवी मजबूती से हो सकेगी।