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चुनाव होने तक काम करेगा वैरी बोर्ड, नोटिफिकेशन जारी

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देहरादून। उत्तराखंड के नौ कैंटों सहित देशभर के 56 कैंटों को भंग करने के आदेश के बाद रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को सभी कैंट बोर्डों को वैरी बोर्ड के गठन के लिए गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। ऐसे में अब एक साल या कैंट बोर्डों में चुनाव न होने तक कैंट बोर्डों में वैरी बोर्ड काम करेगा। वैरी बोर्ड में कैंट बोर्ड अध्यक्ष के साथ कैंट बोर्ड सीईओ और एक नामित सदस्य होते हैं। नामित सदस्य के लिए कैंट बोर्ड अध्यक्ष रक्षा मंत्रालय को तीन लोगों के नाम भेजेंगें। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ही नामित सदस्य की घोषणा करता है। बोर्ड में नामित सदस्य जनता के प्रतिनिधि के तौर पर रहता है।
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दरअसल, उत्तराखंड सहित देशभर के 56 कैंट बोर्डों को कार्यकाल एक साल पहले खत्म हो गया था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने सभी कैंट बोर्डों को छह-छह माह, कुल एक साल का एक्सटेंशन दे दिया था। एक्सटेंशन बोर्ड का कार्यकाल भी 10 फरवरी को खत्म हो जाएगा। कुछ दिन पहले रक्षा मंत्रालय ने कैंट बोर्डों को भंग करने के आदेश जारी किए थे। शुक्रवार को कैंट बोर्डों में वैरी बोर्ड के गठन करने का गजट नोटिफिकेशन भी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी कर दिया है। इससे अब चुनाव की संभावना कम ही नजर आ रही है। हालांकि सूत्रों के अनुसार महानिदेशक रक्षा संपदा विभाग ने रक्षा मंत्रालय को तीन सुझाव दिए थे। इसमें कैंट बोर्डों को एक्सटेंशन देने, भंग करने और कैंट बोर्डों एक्ट अधिनियम 2006 के मुताबिक ही जल्द चुनाव कराना शामिल था। अधिनियम में एक साल से अधिक का एक्सटेंशन का प्रावधान न होने के कारण रक्षा मंत्रालय कैंट बोर्डों को भंग कर इस सुझाव का दरकिनार कर दिया है। अब वैरी बोर्ड और चुनाव का ऑप्सन है।
कैंट क्षेत्रों में बढ़ेगी लोगों की परेशानी
रक्षा मंत्रालय कैंट बोर्ड एक्ट में संशोधन की तैयारी में है। संशोधन में कैंट बोर्डों में मेयर की तरह से उपाध्यक्ष का चुनाव कराने और चुने गए प्रतिनिधियों को अधिकार संपन्न बनाने की बात चल रही है। दूसरी और रक्षा मंत्रालय कैंट बोर्डों में शामिल सिविल क्षेत्रों को नगर निगम या नगर निकायों में शामिल करने पर भी विचार कर रहा है। ऐसे में कैंट बोर्डों के चुनाव जल्द होने की संभावना कम ही नजर आ रही है। यानि एक साल तक कैंट बोर्डों में वैरी बोर्ड की काम करेेगा। इससे लोगों की परेशानियां बढ़नी तय हैं। लोगों का मानना है कि कैंट बोर्ड प्रशासन अपने हिसाब से काम करेगा। इसलिए लोगों को अपनी समस्याओं के लिए भटकना पड़ सकता है। वहीं कैंट बोर्ड के सीईओ अभिषेक राठौर का कहना है कि वैरी बोर्ड के गठन के बाद कैंट क्षेत्रों में विकास के कार्य तेजी से होंगे। अब तक हर छोटी से बात को बोर्ड में पास करवाई पड़ती थी, लेकिन अब इसका झंझट नहीं रहेगा। लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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