तेंदुए की लगातार धमक के चलते वन विभाग ने पिथौरागढ़, डीडीहाट, अस्कोट, बेड़ीनाग, धारचूला रेंज से 40 कार्मिकों की टीम आदमखोर की निगरानी के लिए तैनात कर दी। पिछले आठ दिनों से तेंदुआ क्षेत्र में कहीं नजर नहीं आया।
शुक्रवार दोपहर घास काटने वाले मजदूरों को तेंदुआ पपदेव के जंगल में दिखाई दिया। सूचना पर टीम सक्रिय हुई और शिकारी जॉय ने पपदेव गांव में शाम छह बजे मोर्चा संभाल लिया। रात करीब 12:30 बजे कुछ ग्रामीणों को तेंदुआ दिखाई दिया।
तेंदुआ एक बजे फिर गांव में आ धमका। एक पुराने मकान की छत पर बैठे जॉय को जैसे ही तेंदुआ नजर आया, उनकी राइफल गरजी और एक गोली तेंदुए के सीने को भेदते हुए पार हो गई और दूसरी गोली ने उसकी जान ले ली।
रात में ही वन विभाग की टीम तेंदुए को वन विश्राम गृह में ले आई। टीम में वन रेंजर दिनेश चंद्र जोशी, वन दरोगा हेम जोशी, कैलाश ग्वासीकोटी, मनोज ज्याला, तारा सिंह, जगत सिंह आदि मौजूद रहे।
जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, अपर जिलाधिकारी आरडी पालीवाल, प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. विनय भार्गव, एसडीओ नवीन पंत की मौजूदगी में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विद्यासागर कापड़ी, पशु चिकित्सक सदर डॉ. मनोज जोशी और डॉ. सौरभ भट्ट ने तेंदुए का पोस्टमार्टम किया।
प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि तेंदुए के आगे वाले पंजे के नाखून घिस गए थे। पांव का तला भी घिसा हुआ था। इससे वह जंगल में शिकार करने में असमर्थ हो गई थी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विद्यासागर कापड़ी ने बताया कि मादा तेंदुआ दिखने में स्वस्थ थी पर उसने पिछले सात-आठ दिनों से कुछ नहीं खाया था। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग की टीम ने शव को जला दिया।
190 सेमी लंबा था तेंदुआ
शिकारी जॉय हुकिल की गोली का निशाना बनी आदमखोर मादा तेंदुए की लंबाई पूंछ सहित 190 सेमी और ऊंचाई 75 सेमी थी। उसकी उम्र छह-सात वर्ष बताई जा रही है।