अब सोमवार तक डब्ल्यूईएस से जवाब मिलने का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट दर्ज करवाई जाएगी। विवि प्रकरण में एसआईटी के गठन की भी मांग करेगा ताकि आरोपी किसी भी हाल में न बच सकें।
बीते दिनों दस्तावेज सत्यापन से जुड़ी कनाडा की कंपनी डब्ल्यूईएस ने कुमाऊं विवि को पोस्ट, ईमेल के माध्यम से कुछ मार्कशीट, डिग्रियां भेजीं। डब्ल्यूईएस ने विवि से उनकी सत्यता जानने का प्रयास किया।
विवि ने सत्यापन शुरू किया तो एक के बाद एक मार्कशीट, डिग्रियां फर्जी साबित होती चलीं गईं। 12 मार्कशीट, डिग्रियां फर्जी होने की पुष्टि हो चुकी है जबकि 33 अन्य के फर्जी होने की आशंका है। विवि प्रशासन इनकी जांच कर रहा है।
विवि में पकड़ी गईं मार्कशीटों में सौरभ गुप्ता की एमबीए आईटी, बीएससी कंप्यूटर साइंस, हरप्रीत कौर की एमबीए फाइनेंस एंड मार्केटिंग, असनीन बजाज की एमबीए फाइनेंस, गुरुविंदर सिंह की बीटेक मेकेनिकल, डिप्लोमा इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, मनप्रीत कौर की बीएड, अनुज मित्तल की बीए, रीता अमित प्रेमजी की एमबीए फाइनेंस, अवतार सिंह की बीए, पनीर सेल्वन की एमए, अमनिंदर सिंह की एमबीए इन प्रोडक्शन मैनेजमेंट, साहिब इकबाल की बीसीए, एमसीए की मार्कशीट फर्जी पाई गई है।
मिले कुल 12 आरोपी विद्यार्थियों में सात छात्र, पांच छात्राएं शामिल हैं। फिलहाल विवि इन्हीं के नाम पर रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस इनसे पूछताछ कर अगले पायदान पर कदम रखेगी।
विवि ने एमबीए, बीटेक, बीएड आदि कोर्सों की 12 फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट पकड़ी हैं। हम फर्जी मार्कशीट बनाने वालों पर कानूनी कार्रवाई चाहते हैं। इसलिए जल्द ही पुख्ता जानकारी के साथ रिपोर्ट दर्ज करवाई जाएगी।
- प्रो. संजय पंत, परीक्षा नियंत्रक, कुमाऊं विवि