हैं तो जनप्रतिनिधि। जनता ने चुनकर भेजा है। जनता ने चुनकर भी इसलिए भेजा है कि प्रदेश हित के कुछ काम हो जाएं। पर काम की इन दिनों गिनती रह ही नही गई है।
कुछ समय पहले जरूर ऐसा था। मिसाल दी जाती थी- एचएन(हेमवती नंदन बहुगुणा) १८-१८ घंटे काम करते थे। पर अब सबको पता है कि जन्नत की हकीकत क्या है।
लिहाजा पैमाना बदल गया है। अब पहचान हो रही है कि किस मंत्री का मोबाइल कितनी जल्दी उठ जाता है और किस मंत्री से मिलना कितना आसान है। पर यह है इतना आसान नही है।
मंत्री पद पाकर स्पेशल
पहले तो माननीय चुनाव जीतकर माननीय हुए हैं। फिर मंत्री पद पाकर स्पेशल हुए हैं। अब स्पेशल से जनरल मिल जाए तो नुकसान स्पेशल का ही है। लिहाजा बात करने से लेकर मिलने तक में व्यूह रचना है।
पहले हाल माननीयों केकार्यालयों का। महाभारत के चक्रव्यूह की तरह यहां भी कई मंत्रियों ने तगड़ी व्यूह रचना की हुई है। पहला तो आवास में कार्यालय (विधानसभा में रेस्ट रूम इस काम आता है।
अंदर का कमरा
विधानसभा में मंत्रीजी के कक्ष में आप उनसे मिल सकते हैं पर मंत्री जी अक्सर अंदर वाले रेस्ट रूम में अधिकारियों से बात करना ज्यादा पसंद करते हैं)।
कार्यालय में पहले नंबर पर मीटिंग हॉल। इसके बाद एक अंदर का कमरा। इस कमरे को पार कर गए तो फिर एक और कमरा।
कहने की जरूरत नहीं कि हर कमरे में गेट कीपर (दरबान नहीं जनाब, मंत्री जी के खास लोग। आप जाएंगे तो इनकी नजरे आप का पीछा करती रहेंगी, गोया मंत्री जी के घर का कोई कीमती सामना उठाने की जुर्रत कर रहा हो।) इसके बाद के कमरे में जाकर मंत्री जी से मुलाकात संभव है।
प्रदेश सरकार के एक और मंत्री
जाहिर है कि कई अभिमन्यु इससे पहले ही शहीद हो जाते हैं। यह कहने की जरूरत नही कि वीवीआईपी और वीआईपी के लिए शार्ट कट यहां भी मौजूद है।
अब बात मोबाइल की। एक मंत्रीजी का हाल तो यह है कि लगता है कि उनके पास हर मिलने-जुलने वाले के लिए अलग मोबाइल है। प्रदेश सरकार के एक और मंत्री हैं।
उनके बारे में मशहूर हैं कि मोबाइल पर उनसे वही बात कर सकता है जिससे मंत्री खुद बात करना चाह रहे हों। आप फोन मिलाते रहिए। घंटी बजती रहेगी पर मजाल है कि फोन उठ जाए।
मोबाइल २४ घंटे खुला
प्रदेश सरकार के एक और मंत्री हैं। उनका दावा है कि उनका मोबाइल २४ घंटे खुला रहता है। पर हकीकत यह है कि यह मोबाइल हमेशा यह बताता है कि मंत्री जी बैठक में व्यस्त है।
एक मंत्री जी से मोबाइल पर आप बात नहीं कर सकते पर लैंड लाइन पर उनसे बात हो सकती है। कारण लैंड लाइन पर शायद मंत्री जी को पता ही नहीं लगता कि फोन किसका है।