देश के पांच आयुर्वेदिक कॉलेजों को सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) ने मान्यता नहीं दी है। सीसीआईएम ने इसकी सूची जारी कर दी है। मान्यता न मिलने की वजह से प्रदेश को 300 बीएएमएस सीटों का नुकसान होगा।
प्रदेश में जिन आयुर्वेदिक कॉलेजों को इस साल सीसीआईएम से मान्यता नहीं मिली है, उसमें आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, पूर्व सीएम एवं हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और कैंट विधायक हरबंस कपूर के परिवारों से जुड़े कॉलेज शामिल है। प्रदेश में बीएएमएस, बीएचएमएस व बीयूएमएस के दाखिले के लिए दूसरे राउंड की काउंसिलिंग चल रही है।
इसमें सरकारी व गैर सरकारी 16 आयुर्वेदिक कॉलेज हैं। जबकि दो होम्योपैथिक व एक यूनानी कॉलेज है। आयुर्वेद विवि द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि बीएएमएस, बीएचएमएस व बीयूएमएस की कुल 1240 सीटों पर दाखिले किए जाएंगे। जिनमें स्टेट कोटा की 675 व ऑल इंडिया की 565 सीटें हैं, लेकिन प्रथम राउंड तक केवल सात ही कॉलेज की मान्यता पर स्थिति स्पष्ट हुई। अब आयुष मंत्रालय ने उन कॉलेजों की सूची अपलोड की है जिनके इस सत्र में आवेदन खारिज हुए हैं। इनमें बीएएमएस की 60-60 सीटें हैं। जिनमें स्टेट कोटा व ऑल इंडिया कोटा की 30-30 सीट हैं।
इन कॉलेजों को नहीं मिली मान्यता
बिहाईव आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, सेंट्रल होपटाउन, देहरादून
क्वाड्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, रुड़की
हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, श्यामपुर
श्रीमति पूर्णादेवी मेमोरियल ट्रस्ट दून इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, सहसपुर
बिशंबर सहाय आयुर्वेदिक कॉलेज, रुड़की