निशा पासी आज बेहद खुश है। राजकीय इंटर कालेज लक्खीबाग में 500 में 458 अंक हासिल कर वह स्कूल की सैकेंड टॉपर रही है। उसकी पक्की सहेली सुरुचि भट्ट टॉपर बनी है।
पूर्वी पटेलनगर निवासी निशा को बचपन से ही गम, संघर्ष, पीड़ा, तनाव, दबाब घेरे रहे हैं। पिता स्व. बिंद्रा पासी टेलर थे। सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। तब वह बहुत छोटी थी। यह वर्ष 2006 की बात है।
जब पति की मृत्यु हुई गीता देवी टूट गई थी। अंधकार के अलावा सामने कुछ था ही नहीं। लेकिन फिर स्वयं की प्रेरणा से चट्टानी संकल्प लिया। गीता देवी बल्ब फैक्टरी में श्रमिक हैं। बमुश्किल पांच हजार रुपये पगार पाती हैं। उन्होंने ही निशा को हिम्मत और हौसला दिया।
निशा ने भी हिमालयी साहस दिखाया। स्कूल की प्रिंसिपल नीलम जोशी व शिक्षिकाओं ने आर्थिक सहयोग किया। मां ने घर संभाला और निशा किताबों की दुनिया में खो गई। प्रिंसिपल नीलम जोशी व शिक्षिकाएं सुरक्षा कवच बनी। सहेली सुरुचि भट्ट हमसाया। ट्यूशन का खर्चा शिक्षिकाएं उठाती हैं।