नए सत्र के दाखिलों की शुरुआत से पहले ही छात्र नेता चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। सभी कॉलेजों में छात्र नेता अपने-अपने तरीकों से फ्रेशर्स को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं।
खास बात यह भी है कि इस बार भी सभी संगठनों से कई-कई नेता मैदान में उतरने की हुंकार भर रहे हैं। इससे इस बार भी संगठनों के बीच आपसी कलह सामने आ सकती है।
डीएवी पीजी कॉलेज में छात्र नेताओं ने फेसबुक पर जबर्दस्त प्रचार शुरू कर दिया है। हर कोई अपने-अपने तरीके से प्रचार करने में जुटा है। सभी खुद को छात्र संघ चुनावों में दावेदार के तौर पर पेश कर रहे हैं। कई छात्र जेएनयू को मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं तो कई छात्र कॉलेज की स्थानीय समस्याओं के आधार पर रिझा रहे हैं।
एबीवीपी में कई दावेदार इस साल भी चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। हालांकि अंतिम समय पर संगठन ही तय करेगा कि किसे टिकट दिया जाना है। इसी प्रकार, एनएसयूआई में भी एक छात्रा सहित कई नेता अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी दिखा रहे हैं। यहां भी संगठन का आलाकमान ही टिकट का बंटवारा करेगा। आर्यन में हालांकि इसके मुकाबले कम दावेदार हैं। यह संगठन महासचिव पद पर डीएवी में अपना कैंडीडेट उतारता है।
डीबीएस पीजी कॉलेज की चुनावी तैयारियां भी एफबी वॉर के रूप में सामने आ रही हैं। यहां भी एबीवीपी और एनएसयूआई के दो-दो दावेदार अपना दावा पेश कर रहे हैं। एसजीआरआर पीजी कॉलेज में एबीवीपी, एनएसयूआई से चुनाव लड़ने के लिए कई छात्र अपनी तैयारी में जुटे हैं। फेसबुक, वॉट्स ऐप पर इनका प्रचार तेज हो गया है।
टिकट बंटवारा बनेगा मुसीबत
सत्र शुरू होने से पहले जितना तेजी से चुनाव प्रचार हो रहा है, उस लिहाज से छात्र नेता भी एग्रेसिव हो रहे हैं। छात्र संगठनों के लिए भी चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। एबीवीपी और एनएसयूआई में गत वर्ष भी टिकट बंटवारे को लेकर जबर्दस्त उठापटक और गुटबाजी नजर आई थी। इस साल भी संगठनों के लिए इससे बचने की चुनौती है।