राजधानी देहरादून के डिग्री कॉलेजों में ग्रेजुएशन की मुश्किल दौड़ शुरू हो गई है लेकिन होनहार हर साल मेरिट से मिली सीट खराब कर रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान साल बचाने के चक्कर में होनहार एडमिशन लेते हैं और फिर कहीं और दाखिला होने पर सीट छोड़कर चले जाते हैं। जबकि ग्रेजुएशन में दाखिले के लिए भारी भरकम मेरिट से गुजरना पड़ता है।
डीएवी पीजी कॉलेज, डीबीएस पीजी कॉलेज, एसजीआरआर पीजी कॉलेज में 60 प्रतिशत तक अंकों वाले छात्रों को बीए, बीएससी, बीकॉम में दाखिला नहीं मिलता। इससे ऊपर की अच्छी परसेंटेज वाले छात्र सीटें कब्जा लेते हैं। इसके बाद जैसे ही उनका चयन मेडिकल, इंजीनियरिंग या अन्य किसी परीक्षा के लिए हो जाता है तो वह सीट छोड़ देते हैं।
इस वजह से वह सीट खाली रहती है। डीएवी कॉलेज में गत वर्ष बीए, बीएससी, बीकॉम में मेरिट से दाखिला हासिल करने के बाद करीब 200 छात्रों ने सीट खाली छोड़ दी। इसी प्रकार एसजीआरआर पीजी कॉलेज में भी 30 छात्रों ने सीटें छोड़ दी। डीबीएस पीजी कॉलेज में बीएससी मैथ्स में 310 में से 283 छात्र परीक्षा दे रहे हैं।
यानी 23 छात्रों ने बीएससी मैथ्स की सीट छोड़ दी। इसी प्रकार, बीएससी बायो ग्रुप में यहां 260 में से 238 छात्र परीक्षा दे रहे हैं। यानी 22 छात्रों ने बायो ग्रुप की सीट छोड़ दी। एमकेपी में हालांकि यह संख्या न्यूनतम है। राजधानी के डिग्री कॉलेजों में करीब 300 सीटें होनहारों के चले जाने की वजह से खाली रह गई।
कम परसेंटेज वाले भटक रहे
हर साल मेरिट से दाखिलों की वजह से हाई परसेंटेज वाले छात्रों को तो आसानी से दाखिला मिल जाता है लेकिन कम परसेंटेज वाले छात्र भटक रहे हैं। गत वर्ष भी चारों कॉलेजों में भारी संख्या में छात्र दाखिलों से वंचित रह गए।
इतनी हाई मेरिट से मिलता है दाखिला
एसजीआरआर पीजी कॉलेज में गत वर्ष बीएससी की पहली कटऑफ करीब 82 प्रतिशत रही थी। यानी जिन छात्रों के 12वीं में इतने अंक थे, उन्हें ही दाखिला मिला। डीएवी पीजी कॉलेज में पहली कटऑफ करीब 78 प्रतिशत और डीबीएस पीजी कॉलेज में पहली कटऑफ करीब 81 प्रतिशत थी। इतनी हाईकटऑफ पर सीट कब्जाने वाले छात्र बाद में सीट खराब कर देते हैं।