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अब पांच साल से ज्यादा नहीं रह सकेंगे कॉलेज प्राचार्य

Tue, 13 Dec 2016 02:59 AM IST
मेहताब आलम/अमर उजाला, हरिद्वार
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यूजीसी
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देश भर के 30 केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में अब प्राचार्य सिर्फ पांच साल के लिए कुर्सी संभाल पाएंगे। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने 2010 के रेगुलेशन के तहत प्राचार्यों के कार्यकाल को लेकर नई गाइड लाइन जारी की है। पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर प्राचार्यों को अपने मूल पदों पर लौटना होगा। 
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अब तक कॉलेजों में वरिष्ठ शिक्षक रिटायर्ड होने तक प्राचार्य पद पर बने रहते थे। यूजीसी की नई गाडइ लाइन के मुताबिक अब केवल पांच साल ही प्राचार्य कुर्सी पर बने रह पाएंगे।

पांच साल का टर्म पूरा होने पर सेवा बचने की स्थिति में अगले कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया चलेगी। इसके लिए रिव्यू कमेटी बनाई जाएगी। जिसमें यूजीसी के चेयरमैन और विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से नामित सदस्य शामिल रहेंगे।
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तत्काल लागू होगी यूजीसी की नई गाइड लाइन

प्राचार्य पद को लेकर रहती है खींचतान
ये सदस्य प्राचार्य स्तर के होंगे और केवल उसी कॉलेज से होंगे जिन्हें नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) से ए प्लस ग्रेड मिला है। यूजीसी के सेक्रेटरी प्रो. जसपाल सिंह संधु की ओर से इस बाबत सभी विश्वविद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है।

कॉलेजों में प्राचार्य पद को लेकर प्राचार्य और शिक्षकों के बीच खींचातानी बनी रहती है। कहीं प्राचार्य और प्रबंधन के बीच भी विवाद होता है। हालांकि प्राचार्य पद के लिए वरिष्ठता का पैमाना तय है, बावजूद इसके कई कॉलेजों के विवाद न्यायालयों तक पहुंचते हैं। कानूनी लड़ाई शुरू होने पर कई बार कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ता है।

कार्यकाल को लेकर स्थिति स्पष्ट होने से शिक्षकों की खींचातानी पर भी एक हद तक लगाम लग सकेगी। यूजीसी की नई गाइड लाइन केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में तत्काल लागू होगी। जबकि राज्य के विश्वविद्यालयों में प्रदेश सरकार इस पर फैसला लेगी।
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